प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बिजली व्यवस्था की ठीक से निगरानी न करने पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निदेशक (तकनीकी) अंशुल अग्रवाल को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ गई। शासन ने गुरुवार को पद से हटाने का आदेश जारी कर दिया। अंशुल को हटाने का फैसला मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली चयन समिति की संस्तुति पर किया गया।
उनकी नियुक्ति 26 जून 2018 को की गई थी। इसकी जानकारी मिलने के बाद कार्यालय में चर्चा शुरू हो गई। बीती 7 जुलाई को वाराणसी के 33 केवी मछोदरी विद्युत उपकेंद्र से लगभग 18 घंटे बिजली गुल रही। इससे सरकार की खासी किरकिरी हुई थी। अंडर ग्राउंड केबिल में फाल्ट के कारण बिजली बंद हुई थी।इसका पता लगाकर ठीक कराने में काफी वक्त लगने को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया था।
21 जुलाई को दोबारा इसी उपकेंद्र से 36 घंटे बिजली गुल रही तो पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने जांच बैठा दी। जांच में वैकल्पिक आपूर्ति की व्यवस्था करने में निदेशक (तकनीकी) की लापरवाही सामने आई। जिले के2500 वितरण ट्रांसफार्मर लंबे समय से खराब हैं। मछोदरी प्रकरण में मुख्य अभियंता से लेकर अवर अभियंता तक दोषी पाया गया है।
खराब ट्रांसफार्मरों का समयबद्ध ढंग से रिपेयर कराने में भी निदेशक (तकनीकी) की लापरवाही सामने आई। पावर कार्पोरेशन की प्रबंध निदेशक ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अंशुल अग्रवाल को अपने कर्तव्यों व दायित्वों के निर्वहन में घोर शिथिलता व संवेदनहीनता बरती और वह उ.प्र. सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 के उल्लंघन के दोषी पाए गए हैं।
अंशुल अग्रवाल का मामला 9 अक्तूबर को मुख्य सचिव आर.के. तिवारी की अध्यक्षता में गठित चयन समिति के समक्ष रखा गया। चयन समिति ने जांच रिपोर्ट, अंशुल अग्रवाल के स्पष्टीकरण समेत अन्य तथ्यों का अवलोकन करने के बाद उन्हें निदेशक (वितरण) के पद से हटाने की संस्तुति कर दी। चयन समिति की संस्तुति के आधार पर बृहस्पतिवार को प्रमुख सचिव ऊर्जा आलोक कुमार ने अंशुल को तीन माह का वेतन देकर निदेशक पद से तत्काल हटाने का आदेश जारी कर दिया।