एसजीपीजीआई के न्यूरो सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. अमित केसरी ने बताया कि उच्च मधुमेह वाले मरीजों में कान की रक्त सेल्स के साथ कान के आंतरिक हिस्से की नसें कमजोर हो जाती हैं। इससे खून का प्रसार कम हो जाता है। धीरे-धीरे सुनाई पड़ना बंद हो जाता है।
मधुमेह युवावस्था में ही कान की नसों को सुखा दे रहा है। सुनने में जिस तरह की समस्या 60 साल की उम्र में होनी चाहिए वह मधुमेह रोगियों में 30 से 40 साल में ही हो रही है। इतना ही नहीं मधुमेह रोगियों में नाक में संक्रमण भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में मधुमेह रोगियों की संख्या बढ़ गई है।
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मधुमेह के नियंत्रित नहीं होने पर शरीर के विभिन्न अंगों पर इसका असर पड़ता है। अब इसका कान पर व्यापक असर देखा जा रहा है। मधुमेह वाले मरीजों में कम सुनाई पड़ना, कान में सनसनाहट रहने जैसी समस्या तेजी से बढ़ रही है।
इसकी वजह की पड़ताल करने पर एसजीपीजीआई के न्यूरो सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. अमित केसरी ने बताया कि उच्च मधुमेह वाले मरीजों में कान की रक्त सेल्स के साथ कान के आंतरिक हिस्से की नसें कमजोर हो जाती हैं। इससे खून का प्रसार कम हो जाता है। धीरे-धीरे सुनाई पड़ना बंद हो जाता है।
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ओपीडी में कम सुनाई पड़ने की शिकायत लेकर आने वाले तमाम ऐसे भी मरीज हैं, जिन्हें यह पता ही नहीं है कि वे मधुमेह की चपेट में आ गए हैं। खास बात यह है कि पहले 60 साल की उम्र में जिस तरह की समस्या लेकर मरीज आते थे, उसी तरह की समस्या 30 से 40 की उम्र वाले मरीजों में मिल रही है। जब इनकी जांच कराई जाती है तो मधुमेह अनियंत्रित मिलती है। ऐसे में मधुमेह की दवा शुरू होने पर अपनी मर्जी से बंद नहीं करना चाहिए।
नाक में बढ़ रहा संक्रमण
बारिश के मौसम में कान और नाक में संक्रमण होने की संभावना रहती है। ऐसे में मधुमेह रोगियों में यह संभावना करीब तीन से चार गुना अधिक होती है। डा. केसरी के मुताबिक मधुमेह रोगी को कई दिन तक जुकाम बना है तो उसे चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
ओपीडी में तमाम ऐसे मधुमेह रोगी आ रहे हैं, जिनकी नाक में संक्रमण लगातार बढ़ता गया। इन्हें नियंत्रित करने में लंबा समय लगा। मधुमेह रोगियों में ब्लैक फंगस की संभावना भी अधिक होती है।
कान से तरल पदार्थ निकले तो हो जाएं सचेत
केजीएमयू के ईएनटी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. सुनील कुमार बताते हैं कि कान में किसी तरह का तरल पदार्थ निकले अथवा सफेदी दिखे तो तत्काल डॉक्टर को दिखाना चाहिए। मधुमेह रोगियों में मौसम में नमी बढ़ते ही यह समस्या तेजी से बढ़ती है।
इन मरीजों को कुछ दवाएं दी जाती हैं। जो मरीज लंबे समय तक इलाज नहीं कराते हैं तो उनकी आंतरिक नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। ऐसे में इन मरीजों को कान की मशीन लगानी पड़ती है। जिस गति से मधुमेह रोगियों की संख्या बढ़ रही है, उसी गति से कान के मरीज भी बढ़ रहे हैं।
केस 1
जौनपुर निवासी संजय (35) को मधुमेह से संबंधित किसी तरह के लक्षण नहीं थे। उन्हें कान से कम सुनाई पड़ने लगा। वह केजीएमयू आए। यहां डॉक्टर ने जांच कराई तो उच्च मधुमेह निकला। कान की सुनने की क्षमता काफी कम निकली। अब वह डॉक्टरों की सलाह पर मधुमेह के साथ ही कान के इलाज से भी जुड़ी दवा ले रहे हैं।
केस- 2
उन्नाव निवासी राजकुमार मिश्र ने करीब आठ साल पहले मधुमेह की जांच कराई। कुछ दिन दवाएं खाई और फिर छोड़ दिया। अब उन्हें कान में सनसनाहट होने लगी। कम सुनाई पड़ने लगा। जांच कराई तो मधुमेह की चपेट में थे। कान की जांच कराई तो पता चला कि मधुमेह की वजह से आंतरिक नस सूख गई हैं।