उद्योगपति धनराज नथवानी की दस्तक से राज्यसभा चुनाव का समीकरण बदल सकता है। समाजवादी पार्टी का मास्टर स्ट्रोक या फिर क्रासवोटिंग की शिकार होगी। कई माननीय अपनी अंतरात्मा के आधार पर इधर- उधर हो सकते हैं। इस बार सपा की निगाह एनडीए में शामिल दलों के विधायकों पर है।
सपा की ओर से उद्योगपति धनराज नथवानी के दस्तक देने से राज्यसभा चुनाव का पूरा समीकरण बदलता दिख रहा है। सपा इसे अपना मास्टर स्ट्रोक मान रही है और विरोधी उस पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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सपा ने तीसरे प्रत्याशी को लेकर अभी पर्दादारी बना रखी है। ऐसे में भाजपा के लिए अपना आठवें प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए अपने एनडीए खेमे की एकजुटता बनाए रखनी होगी।
सपा की नजर भाजपा के सहयोगी दलों के उन विधायकों पर है, जो किसी न किसी रूप में सपा से पहले जुड़े रहें हैं और पीडीए से आते हैं। उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनाव के पिछले इतिहास के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि अगर 11 वां प्रत्याशी मैदान में आया तो वोटिंग में कई माननीय अपनी अंतरात्मा के आधार पर इधर- उधर हो सकते हैं।
इन चुनावों में वोटों के आवंटन, दूसरी वरीयता के वोटों के प्रबंधन व धनबल के असर से नतीजे अप्रत्याशित आ सकते हैं। यानी जिसकी जीत की उम्मीद कम हो , उसकी जीत सुनिश्चित हो जाती है।
किस ओर से होगी क्रासवोटिंग
2024 में सपा के कुछ विधायकों ने क्रासवोटिंग की थी। इस बार सपा की निगाह एनडीए में शामिल दलों के विधायकों पर है। इनका समर्थन जुटाना धनराज नथवानी की क्षमता पर निर्भर करेगा।
भाजपा व सपा दोनों में जिन विधायकों को अपने टिकट कटने का खतरा महसूस होगा वह इधर उधर हो सकते हैं। हालांकि फिलहाल तो दोनों भाजपा व सपा दोनों को अपने विधायकों को साथ बनाए रखने की चुनौती है।
एनडीए गठबंधन में सुभासपा, निषाद पार्टी व राष्ट्रीय लोकदल में ऐसे कई विधायक हैं जो किसी न किसी रूप में सपा से जुड़े रहे हैं। सुभासपा के तीन विधायक व रालोद के दो मुस्लिम विधायकों को साथ लाने का जिम्मा सपा के पश्चिमी यूपी के दो नेताओं को दिया गया है।
बताया जा रहा है कि सपा को उम्मीद है कि धनराज तीसरे प्रत्याशी को जिताने के लिए अतिरिक्त मेहनत करेंगे। पिछले राज्य सभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ओर से उद्योगपति संजय सेठ इसी कारण जीत पाए क्योंकि सपा विधायकों में क्रासवोटिंग हो गई।
सपा ने उद्योगपति अनिल अंबानी को 2004 में राज्यसभा भेजा था। उस वक्त अनिल अंबानी की कंपनी यूपी के दादरी में बड़ी परियोजना लगाने पर काम कर रही थी। बाद में कुछ कारणों से अनिल अंबानी ने खुद ही राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था।
विरोधियों के निशाने पर आई सपा
सपा ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट धनराज धनराज नथवानी पर दांव लगाकर सपा ने भाजपा के सामने नई मुश्किल तो खड़ी कर दी है। पर खुद वह विरोधियों के निशाने पर आ गई है।
सुभासपा, एआईएमआईएम ने जहां सपा पर इसको लेकर तीखा हमला किया है, वहीं कांग्रेस तंज करने से नहीं चूक रही। वहीं, सपा के अंदर राज्यसभा जाने के लिए सलीम शेरवानी व आलोक रंजन अभी भी प्रबल दावेदार हैं।