क्रय केंद्र पर खुले में रखी गेहूं की बोरियां
देवरिया। सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद 15 जून से बंद हो गई है। विभाग का दावा है कि इस बार लक्ष्य के सापेक्ष 109 प्रतिशत खरीद हुई है। इससे इतर तमाम किसान आज भी गेहूं बिक्री के लिए भटक रहे हैं। ये ऐसे किसान हैं कि पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन कराने के बाद भी क्रय केंद्रों पर उनका गेहूं खरीदा नहीं जा सका। ऐसे में किसान सरकारी खरीद व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जब ज्यादातर किसानों से गेहूं खरीदा ही नहीं गया तो फिर लक्ष्य कैसे पूरा हुआ।
नई खरीद नीति के साथ जिले में गेहूं की खरीद एक अप्रैल से शुरू हुई थी। शुरुआत में 131 केंद्र बनाए गए थे, मगर बाद में अनियमितताओं के चलते प्रभारियों पर कार्रवाई हुई और सात केंद्र बंद हो गए। कुल 124 केंद्रों पर 15 जून तक सात लाख 85 हजार 120 क्विंटल गेहूं खरीदा गया है। यह लक्ष्य (7.19 लाख क्विंटल) से करीब नौ प्रतिशत अधिक है। विभाग का दावा है कि इतना गेहूं 18 हजार किसानों से खरीदा गया है। उधर, जिले के विभिन्न क्षेत्रों में तमाम किसानों का गेहूं अब तक नहीं खरीदा जा सका है। जबकि इन किसानों ने क्रय केंद्रों पर बिक्री के लिए अग्रिम पंजीकरण भी करा लिया था। पथरदेवा, रुद्रपुर, सलेमपुर क्षेत्र के कई गांवों में किसान लगातार क्रय केंद्र बंद होने से गेहूं बिक्री न कर पाने की शिकायत भी करते रहे। इसके अलावा ऐसे किसानों की संख्या भी सैकड़ों में है जिन्होंने क्रय केंद्रों की अव्यवस्था से आजिज होकर बाजार में आढ़तियों को कम दाम पर गेहूं बेच दिया। इन सबके बावजूद लक्ष्य से अधिक गेहूं की खरीद के दावों पर हर कोई हैरत में है। किसानों का आरोप है कि बिचौलियों के माध्यम से गेहूं खरीद कर लक्ष्य पूरा किया गया है। जांच कराई जाए तो सच सामने होगा।