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गणित में 28 अंक, कोर्ट गया तो मिले 46

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अभय कुमार। - फोटो : अमर उजाला
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पथरदेवा। यूपी बोर्ड की कापियों के मूल्यांकन में फिर से गड़बड़ी सामने आई है। बोर्ड ने जिस छात्र को गणित में सिर्फ 28 अंक दिए थे, शासन के निर्देश पर हुई जांच में उसे अब 46 अंक मिले हैं। हालांकि सभी सवालों का हल सही होने के बाद भी चार अंक क्यों काटे गए हैं, यह स्पष्ट नहीं किया गया है। अब छात्र ने कोर्ट की शरण ली है। मामला वर्ष 2017 की बोर्ड परीक्षा का है।
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पथरदेवा निवासी अशोक विश्वकर्मा का बेटा अभय कुमार वर्ष 2017 में बरईपट्टी इंटर कॉलेज तरकुलवा से 12वीं की परीक्षा में शामिल हुआ था। तरकुलवा के ही जनता इंटर कॉलेज से उसने परीक्षा दी और 418 अंकों के साथ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुआ। अंकपत्र हाथ आया तो उसे गणित में महज 74 अंक मिले थे। इसमें भी गणित द्वितीय प्रश्न पत्र में 28 अंक ही दिया गया था। अन्य सभी विषयों में उसे डिक्टेशन मिला है। छात्र ने अपनी उत्तर पुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन की मांग की। डीआईओएस से लेकर बोर्ड के सचिव और मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा। कहीं सुनवाई नहीं हुई तो बीते फरवरी माह में उसने हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने छात्र की उत्तर पुस्तिका तलब किया तो बोर्ड और शासन भी हरकत में आ गया। आनन-फानन में विशेष कमेटी बनाकर अंग्रेजी और गणित की उत्तर पुस्तिका का परीक्षण कराया गया। परीक्षण के बाद गणित द्वितीय प्रश्न पत्र में अंक 28 से बढ़ाकर 46 कर दिया गया है। बीते 14 मई को बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी के उप सचिव ने पत्र जारी कर छात्र को अंक वृद्धि की सूचना दी है। पत्र में कहा है कि संशोधित अंकपत्र सह प्रमाण पत्र मुद्रण के लिए दिल्ली भेजा गया है। जल्द ही उसे नया अंक पत्र जारी कर दिया जाएगा। अहम बात यह है कि बोर्ड से मिली उत्तर पुस्तिका की प्रति में छात्र के किसी भी सवाल के हल को गलत नहीं माना गया है। सभी हल सही, साफ-सुथरा व स्पष्ट हैं, बावजूद चार अंक क्यों काटे गए इसका कोई जवाब नहीं है।

अब चार अंकों के लिए भी लड़ेंगे लड़ाई
अभय कुमार के मुताबिक उसने उत्तर पुस्तिका में सभी सवालों का सही हल दिया है। परीक्षक ने किसी भी उत्तर को गलत नहीं माना है, बावजूद चार अंक काट लिए गए है। यह उसके साथ अन्याय है। कोर्ट के माध्यम वह अपना हक लेकर रहेगा। वहीं, अभय के पिता अशोक विश्वकर्मा ने बताया कि बेटा गणित में शुरू से ही मेधावी रहा है। हाईस्कूल में उसे 99 अंक मिले थे। इस वर्ष बीटेक में भी उसे पूरे 100 अंक मिले हैं। इंटर में भी इतने ही अंकों की उम्मीद थी, मगर गलत मूल्यांकन के चलते उसे परेशानी झेलनी पड़ी। इसकी भरपाई के साथ दोषियों को दंड भी मिलना चाहिए, ताकि फिर किसी की प्रतिभा के साथ खिलवाड़ न हो सके।
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...तो मेरिट में होता अभय
उत्तर पुस्तिका का सही मूल्यांकन कर नंबर दिए गए होते तो अभय का नाम भी जिले के टॉपरों की सूची में होता। वर्ष 2017 में जिले के इंटर टॉपर को 459 (91.8 फीसदी) अंक मिले थे। अभय के प्राप्तांक में 18 अंक जोड़े जाएं तो उसके अंक भी 436 पहुंच जाएगा।
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