रुद्रपुर में आयोजित जलसे में तकरीर करते मौलाना माज अशरफफोटो संवाद
रुद्रपुर। बृहस्पतिवार की रात आजाद नगर वार्ड में अराकीन मखदूम ए सिमना कॉन्फ्रेंस की ओर से जलसे का आयोजन किया गया। जलसे में उलेमाओं की तकरीर और सोहराब इकराम के नातिया कलाम से रातभर सदाओं मैं सुभान अल्लाह गूंजता रहा।
उलेमाओं ने इस्लाम की हकीकत, मुसलमान के इनाम और मोहब्बत ए रसूल पर विस्तार से तकरीर पेश की। नातिया कलाम और तकरीर पर बड़ी संख्या में महफिल में आए लोगों ने या अली या अली का नारा बुलंद किया।
महफिल में शोहराब इकराम ने दोस्ती निभाते हैं खता नहीं करते, हम हुसैन वाले हैं दगा नहीं करते शेर पढ़कर लोगों में अहलेबैत के प्रति मोहब्बत और वफादारी का जज्बा ताजा कर दिया। इसके बाद उन्होंने एक और शेर पढ़कर माहौल को रूहानी रंग में रंग दिया।
भारत की सरजमीं भी मुवत्तर है इसलिए ख्वाजा मियां के जलवे में जलवा अली का है। उलेमा सैयद अहुदुद्दीन माज अशरफ ने अपनी तकरीर में बताया कि इस्लाम अमन, मोहब्बत और इंसाफ का पैगाम है। मुसलमान का ईमान दिल की वह रोशनी है जो इंसान को सीधी राह दिखाती है।
उन्होंने नबी की सुन्नत पर चलना, अच्छे अखलाक, अमानतदारी और नमाज की पाबंदी को ईमान की पहचान बताया। कहा कि सलाम वह पैमाना है जो जिंदा और मुर्दे की पहचान करता है। सलाम सुन्नत है और जवाब वाजिब होता है। जलसे के अंत में मुल्क की सलामती और कौम की भलाई के लिए दुआ की गई।