संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शहर के कई मोहल्लों में जलस्तर लगातार कम होने लगा है। भूगर्भ जलस्तर कम होने से गर्मी में पीने के पानी का संकट गहराने लगा है। आलम यह है कि पानी की टंकी भरने में ज्यादा समय लगने लगा है।
बारिश के दिनों और जाड़े के मौसम में जहां आधे घंटे में पानी भर जाता है, इस समय एक से दो घंटे तक लग जा रहा है। इसके लिए पानी की बर्बादी भी कम जिम्मेदार नहीं है।
वाहनों की धुलाई करने वालों सेंटरों पर प्रतिदिन हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है, मगर इसे रोका कैसे जाए, इसके लिए जिले में कोई निगरानी व्यवस्था का न होना समाज की चिंता करने वालों को और चिंतित कर रहा है।
राघवनगर, न्यू काॅलोनी, चकियवा, रामनाथ देवरिया, रामगुलाम टोला, लकड़ीहट्टा, रुद्रपुर चौराहा, सीसी रोड, देवरिया खास, बांस देवरिया, अबूबकरनगर समेत कई ऐसे मोहल्ले हैं, जहां दिन चढ़ने के साथ ही घर के बोरिंग से पानी आना कम हो जाता है।
छत पर रखी 500 या 1000 लीटर की टंकी भरने में टुल्लू पंप भी 40 से 41 डिग्री के तापमान में हांफने लग रहे हैं। जानकारों की मानें तो यह समस्या अभी जून तक रहेगी। जुलाई में बारिश के बाद जलस्तर में वृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा है।
शहर के इन मोहल्ले में जलस्तर कहीं-कहीं 30 फीट से भी नीचे पहुंच गया है। हैंडपंप लगाने वाले मैकेनिक भोला ने बताया कि शहर में कुछ स्थान ऐसे हैं, जहां पानी का स्तर हर साल गर्मी में नीचे चला जाता है। इधर गर्मी तेज होने से जलस्तर नीचे चला गया है। इससे अभी से इन जगहों के हैंडपंप से कम पानी निकल रहा है।
जल निगम के अनुसार , शहर के रामगुलाम टोला, राघवनगर इलाके में सामान्य जलस्तर तीन मीटर और दानोपुर इलाके में चार मीटर है। अगर पूरे शहर की बात करें तो औसत जलस्तर तीन से चार मीटर के बीच है।
बरसात में तीन मीटर की गहराई में पानी मिलने लगता है, मगर यह स्थिति फरवरी-मार्च तक रहती है। जैसे ही अप्रैल की गर्मी शुरू होती है तो कुछ इलाकों में भूगर्भ जल का स्तर तेजी से नीचे चला जाता है। सबसे अधिक दिक्कत भुजौली काॅलोनी, सीसी रोड, चकियवा, रामगुलाम टोला, गोरखपुर रोड, न्यू काॅलोनी, साकेतनगर आदि जगहों पर है।
जलस्तर नीचे जाने की वजह से हैंडपंप से पानी कम आने लगता है। अधिकतर घरों में हैंडपंप की बोरिंग पर टुल्लू पंप लगाकर पानी टंकी भरने में एक घंटे से अधिक का समय लग जा रहा है।
स्थानीय लोग यह भी बता रहे हैं कि इन दिनों से तीसरी व चौथी मंजिल पर रखी टंकियों में पानी भरने में घंटों समय जा हो रहा है। जानकार बताते हैं कि ऐसा इसलिए हो रहा है कि नीचे से निकलने वाले पानी की मात्रा कम होने के चलते टुल्लू पंप इतना प्रेशर नहीं बना पाता कि पानी 30 से 35 फी की ऊंचाई पर चढ़ सके।
खास बात यह है कि पानी की इस समस्या से जूझ रहे लोगों की दिनचर्या पर प्रभाव पड़ रहा है। सबसे अधिक दिक्कत उन मोहल्लों में आ रही ह,ै जहां पेयजल के लिए पाइप लाइन नहीं है।
वाहन धुलाई सेंटरों और आरओ प्लांट की नहीं होती है निगरानी : शहर में करीब 50 आरओ वॉटर प्लांट संचालित हो रहे हैं। इनमें से किसी ने भी भूगर्भ जल विभाग से एनओसी नहीं लिया है। वहीं, करीब 40 से अधिक वाहन धुलाई सेंटर हैं।
इनके पास भी एनओसी नहीं है, जबकि नियम यह है कि दोनों को एनओसी लेना अनिवार्य है। इन दोनों सेंटर पर रोजाना हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। इसका असर यह है कि भूगर्भ जल नीचे जाने से साधारण हैंडपंप और आधा हार्स पॉवर के टुल्लू पंप पानी ही नहीं उठा रहे हैं।
बिना हैंडपंप चलाए मोटर नहीं उठाता है पानी : राघवनगर की प्रिया गुप्ता बताती हैं कि नंवबर-दिसंबर माह में मोटर चलाने पर टंकी 15 से 20 मिनट में भर जाती है, जबसे गर्मी बढ़ी है, मोटर पानी कम उठा रहा है।
नल चलाने के बाद पंप चालू करने पर पानी ऊपर चढ़ता है।
टंकी भरने में भी अब आधे से एक घंटा लग जा रहा है। न्यू काॅलोनी निवासी अरुण राव ने बताया कि 30 फीट बोरिंग पर पानी नहीं उठा रहा है।