संवाद न्यूज एजेंसी
मदनपुर/रुद्रपुर। देवरिया और गोरखपुर जिले की सीमा पर बसे गायघाट गांव वालों की मुसीबत दूर नहीं हो रही है। राप्ती नदी लगातार 70 साल से गांव वालों को दौड़ा रही है। दो बार गांव को उजाड़ चुकी नदी अब तीसरे गांव के पास बंधे से सटकर बह रही है। कटानरोधी काम होने के बावजूद यहां ग्रामीणों को हर बार बाढ़ में खतरा बना रहता है। हालांकि सिंचाई विभाग पिछले दो साल से नदी की धारा मोड़ कर गांव को बचाने के प्रयास में जुटा है।
वर्तमान में बसा गायघाट गांव वर्ष 1978 में बाढ़ के दौरान वर्तमान में स्थित गोरखपुर जिले सेमरा गांव के समीप बताया जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, दो बार आई प्रलयंकारी बाढ़ के बाद वह करीब डेढ़ किमी दूर हो गए।
नदी तब भी पीछा करना नहीं छोड़ी। वर्ष 1998 में ग्रामीणों को जबरदस्त बाढ़ का कहर झेलना पड़ा। बांध कटने से पूरा गांव चपेट में आ गया और करीब सौ मीटर दूर आबादी ने नया डेरा डाला।
हर साल बाढ़ के दंश को देख तीन दर्जन से अधिक परिवार शहर की तरफ पलायन कर गए। वह खीरी लखमीपुर जिले और मदनपुर, महेन के पास बस गए।
गांव को बचाने के लिए बने बंधे पर जबरदस्त कटान को रोकने के लिए दो साल पहले कंकरीट का पारकोपाइन प्रोजेक्ट से काम कराया गया, मगर नदी का यू टर्न सीधे ठोकर मारने के कारण बांध कटता रहा। अब नदी का रुख मोड़ने के प्रयास में जुटा है।