संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। क्षेत्र के अधिकतर गांव सरयू और राप्ती नदी तट पर बसे हैं। बरसात के मौसम और बाढ़ आने पर लोगों की दुश्वारियां बढ़ जाती हैं। प्रत्येक वर्ष चारों ओर से पानी से घिर जाने के कारण भदिला प्रथम गांव टापू बन जाता है। बाढ़ हटने तक लोगों का जीवन कैद होकर रह जाता है। आवागमन के लिए नाव ही मात्र सहारा होती है।
इन दिनों सरयू और राप्ती नदी के जलस्तर में हो रहे उतार-चढ़ाव से गांव के लोगों की सांसे अटकी हुई हैं। ग्राम पंचायत भदिला प्रथम की आबादी करीब 35 सौ से चार हजार है। इस गांव में गोरखपुर जनपद से होकर आना-जाना पड़ता है। राप्ती नदी तट पर गांव बसा है। वर्तमान में लोग अस्थायी पुल बनाकर खेतों आदि के रास्ते आवागमन करते हैं।
बाढ़ के दिनों में यह गांव चारों तरफ से पानी से घिर जाता है। बाढ़ के दौरान स्कूली छात्रों, नौकरीपेशा और दिहाड़ी मजदूरों की परेशानी बढ़ जाती है। लोग जान जाेखिम में डालकर नाव से आवागमन करते हैं। कभी-कभी नाव पलट भी जाती है। अन्य दिनों में लोग खेतों की पगडंडियों आदि के रास्ते आवाजाही करते हैं।
केंद्रीय जांच टीम ने नौ सितंबर 2020 को अधिकारियों के साथ भदिला प्रथम गांव का दौरान किया था। ज्वाइंट सेक्रेटरी रमेश गंटा की टीम तत्कालीन डीएम अमित किशोर और एसडीएम सुनील कुमार सिंह के साथ भदिला गांव पहुंचे थे। 105 वर्षीय किसान राजमंगल यादव ने बारिश और बाढ़ के कहर को रूला देने वाला बताया था।
1998 में गांव की स्थिति और भी दयनीय हो गई थी। दिल्ली की टीम ने शैलेष कुमार, आरबी कौल, बीसी शर्मा, डॉ.मान सिंह, अभिलाष कुमार शामिल थे। नाव से उतरने के बाद प्राथमिक विद्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सभी ई-रिक्शा से गए थे। टीम के सदस्यों ने शासन को रिपोर्ट प्रेषित करने का आश्वासन देते हुए सवर्णा धान की रोपाई करने के लिए प्रेरित किया था।