फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूक्रेन में फंसे छात्र घर वालों से लगा रहे बचाने की गुहार

विज्ञापन
विज्ञापन
यूक्रेन में फंसे छात्र घर वालों से लगा रहे बचाने की गुहार
विज्ञापन

देवरिया। रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग का असर जिले में भी देखने को मिल रहा है। यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गए कई छात्र वहां फंस गए हैं। उन्हें पल-पल अपनी जान जाने का भय सता रहा है। घर वालों को वह फोन कर वहां से निकालने की गुहार लगा रहे हैं।
बरहज के पटेलनगर मध्य के ऋषि साथियों के साथ बंकर में छिपकर अपने को सुरक्षित किए है। यूक्रेन में हमले के तीसरे दिन भी 40 किलोमीटर की दूरी पर फूट रहे बम से ऋषि के परिवार के लोग सहमे हैं। परिजनों ने उच्चाधिकारियों और मंत्रालय के आला अधिकारियों से बेटे के वतन वापसी कराने की मांग की है। नेहरू लाल निषाद की चार संतानों में दूसरे नंबर के ऋषि वर्ष 2019 में मेडिकल की पढ़ाई करने गया। वह डेनीप्रो स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस तृतीय वर्ष का छात्र है। यूक्रेन पर रूस की सैन्य कार्रवाई से परिवार के लोगों की चिंता बढ़ गई है। परिवार के लोग ऋषि से लगातार फोन पर संपर्क बनाए हुए हैं। परिजनों का कहना है कि शनिवार को ऋषि की वतन वापसी के लिए उड़ान थी। फोन पर ऋषि ने बताया कि वह डेनीप्रो शहर में हरिना एवेन्यू 57 में सात साथियों के साथ बंकर में छिपा है। उसके साथ रोमानिया, अफ्रीका, इटली सहित अन्य देशों के अलावा सात भारतीय भी हैं। ऋषि पिता से घर वापसी की जिद कर रहा है। उसका कहना है कि पापा यहां बहुत डर लग रहा है। मुझे वापस घर बुला लिजिए। फोन पर रो-रो कर उसका बुरा हाल है। यूक्रेन में दिन-ब-दिन बिगड़ते हालात से घर में लोग खाना-पीना भूल गए हैं। मां इंद्रावती निषाद, छोटी बहन सुनीता और उसकी भाभी रेखा समाचार के जरिए हालात पर नजर रखे हैं। सभी एक-दूसरे को हिम्मत बढ़ा रहे हैं और सकुशल घर वापसी के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं। पिता नेहरू लाल सोशल मीडिया पर बेटे को घर बुलाने के लिए गुहार लगा रहे हैं। एसडीएम ध्रुव शुक्ल ने बताया कि इस मामले में विदेश मंत्रालय से संपर्क कर युवक को सुरक्षित भारत लाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

हॉस्टल के बेसमेंट में छिपी है रुद्रपुर की बेटी सृष्टि
रुद्रपुर। यूक्रेन के डनिप्रो शहर में मेडिकल की पढ़ाई करने गई रुद्रपुर की बेटी फंस गई है। मांगा कोड़र गांव की सृष्टि एक हजार भारतीय छात्रों के साथ हॉस्टल के बेसमेंट में छिपी है। डनिप्रो शहर पर हो रही बमबारी के बीच फंसे छात्र भारतीय दूतावास से उन्हें सुरक्षित निकालने की गुहार लगा रहे है। लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। छात्रों का राशन-पानी भी समाप्त होने वाला है। मांगा कोड़र गांव के अमरेंद्र यादव रेलवे में कर्मचारी हैं। उनकी छोटी बेटी सृष्टि यूक्रेन के मेडिकल यूनिवर्सिटी ऑफ डनिप्रो में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा है। वहां के हालात बताते हुए वह रोने लगती है। बताया कि यहां हालात बहुत डरावना है। तनाव बढ़ने के बाद भी विदेशी छात्रों को जानबूझकर रोका गया। यहां करीब एक हजार छात्र फंसे हुए हैं। दिन-रात धमाके हो रहे हैं। हॉस्टल के बेसमेंट को अस्थाई बंकर बना दिया गया है। सभी लोग बंकर में छिपे हैं। तीन दिन से शहर में सायरन बज रहा है। सारी दुकानें बंद हो गई हैं। राशन-पानी खत्म हो रहा है। 24 घंटे बाद छात्रों को भूखे रहना पड़ेगा। तीन दिन से सभी छात्र जाग रहे हैं। भारतीय दूतावास छात्रों की कोई मदद नहीं कर रहा है। दूतावास अब तक किसी भी छात्र को बाहर नहीं निकाल पाया है। संपर्क करने पर वहा के एक अधिकारी ने कहा कि हम अभी कोई मदद नहीं कर पाएंगे। जल्द कोई कदम नहीं उठाया गया तो भारतीय छात्र भूख से मर जाएंगे। इधर, सृष्टि के माता पिता और उसके गांव वालों की चिंता बढ़ती जा रही है। पिता अमरेंद्र यादव ने विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री से बेटी की जान बचाने की गुहार लगाई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें