सलेमपुर-बरहज रेलखंड पर जल्द चलेगी ट्रेन, सीआरएस ने की विद्युतीकरण परियोजना की जांच
देवरिया/बरहज। सलेमपुर-बरहज रेलखंड पर ट्रेन संचालन का रास्ता साफ हो गया है। करीब 20 किलोमीटर विद्युतीकरण कार्य का रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) लखनऊ मोहम्मद लतीफ खान ने पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी के डीआरएम विजय पांजियार सहित अन्य अधिकारियों के साथ परियोजना का निरीक्षण किया। उन्होंने पॉवर सब-स्टेशन, डिस्ट्रीब्यूशन लाइन समेत यातायात प्रबंधन आदि का जायजा लिया। उनकी हरी झंडी मिलते ही ट्रेन चलने लगेगी।
बुधवार को करीब 11.30 बजे आठ बोगियों वाले स्पेशल निरीक्षण यान से रेल अधिकारी और आरपीएफ टीम बरहज रेलवे स्टेशन पहुंची। यहां पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी आरके यादव, मुख्य विद्युत इंजीनियर एके शुक्ल ने अन्य अधिकारियों के साथ 50 हर्ट्ज एसी कर्षण लाइन फिटिंग, साइटिंग बोर्ड, ओवरहेड लाइन, पॉवर फीडर, समपार फाटकों, कर्वेचर, पुल-पुलियाओं की गुणवत्ता, जबकि पोल फिटिंग्स, उस पर लगे सिग्नल्स, टर्नआउट्स पर लेवल, ट्रैक से ओवरहेड ट्रैक्शन की दूरी, कर्व, प्वाइंट्स और क्रासिंग, विद्युतीकृत कलर लाइट सिग्नल, ओवरहेड लाइट फिटिंग्स, रिले रुम, यात्रियों की सुरक्षा-संरक्षा आदि का जांच किया। अधिकारियों ने स्पेशल यान के जरिए 60 किमी प्रतिघंटा की औसत चाल से स्पीड ट्रॉयल किया। करीब डेढ़ घंटे तक सघन निरीक्षण किया गया। पालिकाध्यक्ष उमाशंकर सिंह विशेन और रेल परामर्शदात्री समिति सदस्य अमरेंद्र गुप्त ने बरहजिया ट्रेन के जल्द संचालन की सिफारिश की।
इस दौरान रामाश्रय यादव, अभयानंद तिवारी, संजय पासवान, अमला कुशवाहा, काशीपति शुक्ल, अमित यादव, राजित यादव, तारकेश्वर जायसवाल, वीरबहादुर यादव आदि मौजूद रहे।
खतरनाक ट्रैक पर बरहजिया चलाने की तैयारी
निरीक्षण के दौरान सीआरएस एवं डीआरएम को नहीं दिखी गड़बड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया/बरहज। पूर्वोत्तर रेलवे के खतरनाक बने सलेमपुर-बरहज बाजार रेलखंड़ पर रेल अधिकारियों ने विद्युत रेलगाड़ी चलाने की तैयारी कर ली है। आंख मूद कर अधिकारियों ने इस रेल खंड को सुरक्षित माना है। हाई स्पीड विद्युत ट्रेन चलान के लिए डीआरएम वाराणसी सहित रेल संरक्षा आयुक्त ने इस रेल खंड का विधिवत निरीक्षण भी किया। जबकि रेल ट्रैक की हालत बेहद नाजुक है। 22 किलोमीटर लंबे सलेमपुर-बरहज रेल खंड पर करीब 18 करोड़ की लागत से विद्युतीकरण का काम पूरा हो चुका है। सभी समपार पर अत्यधिक ऊंचाई के वाहनों को रोकने के लिए बैरिकेडर लग चुके हैं। इस कार्य को संपन्न करने में रेलवे को पूरे एक वर्ष लगे हैं। इस रेलखंड पर बरहजिया ट्रेन के संचालन के लिए 26 फरवरी को मंडल रेल प्रबंधक वाराणसी वीके पंजियार ने निरीक्षण किया था। अपनी अंतिम मुहर लगाने बुधवार को रेल संरक्षा आयुक्त, उत्तर पूर्वी सर्किल मो. लतीफ खान सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पीड ट्रायल कर लगभग अपनी हामी भर दी। लेकिन संचालन की तिथि नहीं तय की। एक वर्ष से हो रहे निर्माण के साथ रेलवे के दो बड़े अधिकारियों के निरीक्षण में भी ट्रैक की अनदेखी की गई है। अधिकारी या तो निरीक्षण के दौरान सैलून से ट्रैक पर उतरे नहीं हों या उन्हें संबंधित अधिकारियों ने दिखाया ना हो। बरहज बाजार रेलवे स्टेशन से एक किमी पूरब नवापार गांव के सामने एवं नवापार रेल पुल के उस पार रेल ट्रैक के भीतर से गिट्टी एवं बेड बैंक से मिट्टी गायब है। जबकि इस निर्माण कार्य के दौरान अभियांत्रिकी विभाग, कैरेज डिपो, आरपीएफ सहित वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंताओं ने भी कई बार दौरा किया है, लेकिन सबने इस खतरे को नजरअंदाज किया। नवापार के लोग बताते हैं कि गांव के सामने रेल ट्रैक से गिट्टी एवं कई स्थानों से बगल की मिट्टी वर्षों से गायब है। जब गांव के सामने से रेलगाड़ी गुजरती है तो पटकन की आवाज से गांव वाले डर जाते हैं, कहीं रेलगाड़ी पलट न जाए। इसकी शिकायत कई बार रेल अधिकारियों से की गई लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया।