बाजार में धड़ल्ले से बिक केमिकल रंग से रंगा हल्दी, खाद्य विभाग ने लिया नमूना
काली मिर्च, धनिया और जीरा में भी मिलावट, मिलावटी मसाला खाने से लिवर होती है प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। रसोई घर में रोजाना उपयोग में आने वाली औषधीय गुणों वाली हल्दी, काली मिर्च, जीरा, धनिया, बेसन और सरसों के तेल आदि में मिलावट करने से धंधेबाज चूक नहीं रहे हैं। जानकार बताते हैं कि हल्दी का वजन बढ़ाने के लिए पीले रंग की कोटिंग की जा रही है तो चमक के लिए लेड क्रोमेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिस हल्दी को आप खा रहे हैं हो सकता है वह खराब गांठ वाली हो। चिकित्सकों का कहना है कि मिलावटी बेसन, काली मिर्च, हल्दी, जीरा का खाने में इस्तेमाल करने से लिवर खराब हो सकता है।
जानकार बताते हैं कि जिले में हर माह एक करोड़ रुपये की काली मिर्च में बारीकी से मिलावट कर उसे खपा दिया जा रहा है। इसमें पपीते और भिंडी के बीज के साथ ही टेस्ट के लिए केमिकल मिलाया जा रहा है। शाहजहांपुर और कानपुर से आने वाली काली मिर्च में धंधेबाज पहले ही यह खेल कर दे रहे हैं। मिलावट वाला माल पकड़ में न आए, इसके लिए ट्रांसपोर्ट की बिलिंग कर मंडी तक लाया जाता है।
बाजार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इसमें कानपुर, दिल्ली और शाहजहांपुर के धंधेबाज जुड़े हैं। हल्दी में भी मिलावटखोरों ने खेल कर रखा है। मिलावटी हल्दी की आपूर्ति कानपुर से की जा रही है। गांव-देहात के कस्बों में कच्ची हल्दी (20 से 25 रुपये प्रति किलोग्राम) के भाव से थोक में मिलावटखोर खरीदकर कानपुर भेज देते हैं। वहां अच्छी गांठ को अलग कर लिया जाता है। खराब हल्दी के ऊपर पीले रंग या लेड क्रोमेट की कोटिंग कर दी जाती है। इससे उसमें चमक आ जाती है। इसके बाद दोनों को मिलाकर बाजार में पहुंचाया जा रहा है।
चमकाने के बाद इसका भाव 250 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम हो जाता है। इसी गांठ को पीसकर धंधेबाज बेच देते हैं और मोटा मुनाफा कमाते हैं। जिले में हर माह करीब पांच सौ क्विंटल हल्दी की खपत होती है। इसमें करीब 30 प्रतिशत मिलावटी है।
जीरा में चारकोल डस्ट, मिट्टी, घास के बीज या रंगे हुए घास का बीज मिलाया जा रहा है। जबकि जीरा प्रमुख मसालों में एक है और अपनी खुशबू और औषधीय गुणों के चलते जाना जाता है। धनिया पाउडर में भी धंधेबाज जंगली पाउडर, आटे की भूसी, नमक, पीसे हुए बीज आदि मिलाकर बेच रहे हैं। खाद्य विभाग की ओर से लिए गए नमूने में बेसन व हल्दी में मिलावट होने की पुष्टि हो चुकी है।
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जीरा खरीदने से पहले कर लें जांच
विशेषज्ञों का कहना है कि जीरा चेक करने के लिए इसे हथेली पर रखें। यदि हथेली पर काला रंग आ जाए तो यह नकली है। दूसरा तरीका यह है कि एक गिलास पानी में जीरा डालकर कुछ देर के लिए छोड़ दें। असली होगा तो यह तली में बैठ जाएगा। पानी में रंग दिखे या जीरा धीरे-धीरे घुल जाए तो यह नकली है। मिलावटी जीरा खाने से पेट में पथरी, इंफेक्शन, उल्टी, अल्सर व स्किन से जुड़ी समस्या हो सकती है।
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कुछ लोगों की वजह से अन्य व्यापारियों को होती है परेशानी
व्यापार मंडल के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल ने शनिवार को बताया कि खाद्य पदार्थों में मिलावट न हो, इसके लिए व्यापारियों को सजग किया जाता है। कोई भी खाद्य पदार्थ हो या अन्य सामान जो सेहत के लिए हानिकारक है, उसे बेचना अपराध की श्रेणी में आता है। केवल कुछ लोग खेल करते हैं और बदनामी अन्य व्यापारियों की होती है।
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हल्दी में औषधीय गुण होते हैं, मगर मिलावटी हल्दी खाने से सेहत को कई तरह के नुकसान पहुंचता है। मिलावटी हल्दी में कैंसर कारक पदार्थ जैसे कि लेड, कैडमियम और मरकरी मिलाए जाते हैं। काली मिर्च, धनिया व जीरा में मिलावट से पाचन समस्याएं हो सकती हैं। यह लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
-डॉ. सराजुद्दीन, एमडी, मेडिकल कॉलेज
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खाद्य विभाग ने पिछले सप्ताह हल्दी, काली मिर्च, अरहर दाल, सरसों का तेल सहित अन्य सामान के नमूने लिए हैं। इन्हें जांच के लिए लैब में भेज दिया गया है। पिछले दिनों लिए गए नमूने में बेसन आर हल्दी का एक-एक नमूना फेल पाया गया है। बेसन में चना व मटर दोनों का मिश्रण पाया गया है।
-विनय सहाय, सहायक आयुक्त खाद्य