चनुकी। भागलपुर पुल के बाद सरयू नदी की धारा कई हिस्सों में बंट जाती है। दो धाराओं के बीच की सैकड़ों एकड़ ऊपजाऊ जमीन पर आसपास के गांव के लोग खेती करते हैं। कुछ लोग वहीं झोपड़ी बनाकर रहते हैं।
नदी के इस देवारा क्षेत्र में तीन साल से बार-बार किसान पीपा पुल लगने का आश्वासन सुनकर थक गए हैं। हर नेता और अफसर पीपा पुल लगने का दावा तो करता है, लेकिन आश्वासन पर अमल नहीं होता। इस बार पुल को मंजूरी भी मिल गई थी, लेकिन तकनीकी कारण से मामला अटक गया।
नतीजा यह है कि कभी नदी पार करते हुए कंबाइन पलट जा रही है तो कभी नाव से गिरकर डूब रहा है।
रविवार को सरयू नदी में नदौली गांव का एक युवक नाव से कूदने की वजह से डूब गया।
युवक नदी के दूसरी तरफ स्थित अपने खेत से मड़ाई के बाद गेहूं और भूसा नाव पर लादकर घर आ रहा था। नदी में पीपा पुल के लिए खोदे गए गड्ढ़े में नाव फंसकर डगमगाई तो हादसे के भय से युवक नदी में कूद गया।
कहा जा रहा है कि वह जहां कूदा था, वहीं पीपा का पुल लगाने के लिए कुछ दिन पहले गड्ढा खोदा गया था। पानी में फंसने की वजह से युवक बाहर नहीं निकल पाया और उसकी मौत हो गई।
पहले टेंडर हुआ फिर निरस्त कर दिया : नदौली निवासी अविनाश तिवारी, ओमप्रकाश तिवारी, भोलू तिवारी, संजय तिवारी, रामानंद आदि ने बताया कि सरयू नदी के किनारे बसे गांव नदौली महाल मंझरिया, कौसड़, चुरिया, पिंडी, खेमादई के सैकड़ों लोगों की खेती नदी के बीच में है।
दरअसल, भागलपुर पुल से आगे नदी कई धाराओं में बंटकर बहती है। दो धाराओं के बीच उपजाऊ जमीन खाली पड़ी है। इन जमीनों तक जाने के लिए किसानों को नदी की धारा छोटी नाव से पार करनी पड़ती है। क्योंकि गर्मी के दिनों में इन धारा में चार से पांच फुट गहराई तक ही पानी होता है।
पानी कम होने की वजह से बड़ी नाव का संचालन नहीं हो सकता। ऐसे में पीपा पुल ही इनके संकट का एकमात्र उपाय है। लार क्षेत्र के नदौली गांव में सरयू नदी की एक धारा पर पीपा पुल लगाने का टेंडर हुआ था। लेकिन लोक निर्माण विभाग ने किसी आंतरित दबाव में टेंडर को ही निरस्त कर दिया।
ठेकेदार ने टेंडर के निरस्तीकरण के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की, जिस पर कोर्ट ने स्टे दे दिया। तब से न तो पुराने ठेकेदार को काम मिल रहा है और न ही नया टेंडर ही हो पा रहा है।