फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Deoria News: विरोधियों ने बंदी के नाम से पत्र लिखकर जेल प्रशासन पर लगाए थे आरोप

Wed, 12 Feb 2025 01:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
विज्ञापन
विज्ञापन
देवरिया। जिला कारागार के एक बंदी के नाम से कार्यालयों को भेजा गया पत्र गलत मिला है। यह पत्र उसके विरोधियों ने भेजा था। मोहम्मद ताहिर नामक बंदी के नाम लिखे गए पत्र में जेल प्रशासन पर कई आरोप भी लगाए गए थे। पत्र के संबंध में जेल अधीक्षक व जेल प्रशासन ने जानकारी ली तो बंदी ने इंकार कर दिया। उसका कहना था कि उसने कोई पत्र नहीं लिखा है बल्कि उसे केस में फंसाने व बदनाम करने की नियत से उसके विरोधियों ने जारी किया है। उसने अपना लिखित बयान दर्ज कराते हुए पांच लोगों को आरोपी बनाया है। उसके बयान पर जेल प्रशासन ने जब जांच पड़ताल की तो उसका कथन सही निकला। बंदी के ऊपर जानलेवा हमला करते हुए गोली चलाई गई थी। इसी मामले के आरोप में उसी के मोहल्ले के कई लोग जेल में बंद होकर सजा काट चुके हैं। इसके बाद जेल प्रशासन आगे की कार्रवाई में जुट गया। इधर बंदी के वायरल फोटो की जानकारी ली तो पता चला कि यह फोटो 2018 का है। उस समय भी जेल में बंद बंदियों ने फोटो वायरल किया था। फिलहाल जेल प्रशासन इस मामले में कागजी कार्रवाई कर रहा है।
विज्ञापन

आठ फरवरी को कई कार्यालयों में स्पीड पोस्ट से भेजा गया पत्र शहर के एक मोहल्ला निवासी मोहम्मद ताहिर खान पुत्र स्व. एहतशामुर रहमान का नाम लिखा हुआ था। इसमें लिख गया था कि वह नवंबर 2024 से एक मामले में जिला कारागार देवरिया में निरुद्ध है। जिला कारागार में भ्रष्टाचार है।
जेल में सिपाही 100 रुपये देने पर मोबाइल से बात कराते हैं और वीआईपी बंदियों को अच्छा भोजन दिया जाता है। प्रत्येक विचाराधीन बंदी से काम कराने के नाम पर 1600 रुपये लिया जाता है और जेल के अधिकारियों से शिकायत करने पर नंबरदारों से पिटवाया जाता है। इस पत्र के बाद जेल में सनसनी फैल गई। इसके बाद जेल अधीक्षक प्रेम सागर शुक्ला ने इसकी जांच करने का निर्देश दिया।
विज्ञापन

जांच व बंदी से पूछताछ में पत्र लिखने की बात की पुष्टि नहीं हुई। उसने अपने लिखित आवेदन में कहा कि उसके मोहल्ले के ही कुछ लोगों से उसका विवाद चल रहो है। उसके ऊपर गोली चलाने के आरोप में मोहल्ले के ही नदीम खान, इम्तियाज व अमजद सहित आधा दर्जन लोग जेल जा चुके है, जो 30 अक्टूबर 2023 को बाहर निकले। इसके बाद उससे बदला लेने की कई बार कोशिश कर चुके हैं। चार फरवरी को न्यायालय में पेशी के दौरान उससे कहासुनी करते हुए मारपीट पर उतारू हो गए।
इसकी सूचना उसकी पत्नी ने जेल प्रशासन, पुलिस व न्यायालय को आवेदन के माध्यम से दी है। इसकी जानकारी होने के चार दिन बाद उनके द्वारा मेरे नाम का फर्जी पत्र जेल प्रशासन के खिलाफ लिखकर कई कार्यालयों में स्पीड पोस्ट कर दिया गया। उसके बयान व लिखित कॉपी लेने के बाद जेल प्रशासन ने वायरल फोटो की जांच कराई तो जानकारी मिली कि वर्ष 2018 की फोटो है। उस समय भी इसे वायरल किया गया था। वर्तमान में जेल में किसी बंदी को मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है। समय समय पर इसकी जांच भी कराई जाती है। जेल अधीक्षक प्रेम सागर शुक्ला ने कहा कि जांच में फोटो पुराना निकला है। पत्र के संबंध में बंदी से पूछताछ हुई तो उसने अपना लिखित बयान जेल प्रशासन को उपलब्ध कराया है। इसमें उसने अपने दुश्मनों को आरोपित किया है। उसका कहना है कि उससे बदला लेने के लिए वह इस तरह का फर्जी पत्र जारी किया है। फिलहाल वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले से अवगत करा दिया गया है। उनके निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें