संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। राजकीय बाल गृह बालक से दो किशोरों के लापता होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े हैं मगर जिम्मेदार अधिकारी सामने नहीं आ रहे हैं। बाल गृह की दीवार पर जिला प्रोबेशन अधिकारी (डीपीओ) के नाम से दर्ज मोबाइल नंबर सेवा में ही नहीं है।
इससे घटना के बाद की कार्रवाई, बच्चों की तलाश और सुरक्षा में हुई चूक को लेकर विभाग का पक्ष स्पष्ट नहीं हो सका।
बाल गृह में रहने वाले कक्षा छह में पढ़ने वाले दो किशोर 10 सितंबर की सुबह पास स्थित जूनियर हाईस्कूल में पढ़ने गए थे मगर वापस नहीं लौटै।
शाम को बच्चों की गिनती के दौरान दोनों के गायब होने की जानकारी हुई। इसके बाद कोतवाली पुलिस को सूचना दी गई और दोनों की तलाश शुरू हुई।
इससे पहले जून में भी राजकीय बाल गृह से करीब 12 वर्षीय एक बालक लापता हुआ था। उस समय प्रभारी जिला प्रोबेशन अधिकारी आदिश मिश्रा को घटना की जानकारी दी गई थी और मामला सीडीओ समेत अन्य अधिकारियों तक पहुंचा था।
अब तक इस तरह की तमाम घटनाएं हो चुकी हैं। हर बार कार्रवाई सिर्फ दिखावे को हो रही है। इस बार भी अंदरखाने बहुत कुछ चल रहा है, मगर सब पर्दे के पीछे रखा जा रहा है।
अधिकारियों ने तो जैसे मौत व्रत ही ले रखा है। सबसे बड़ा सवाल बाल गृह में लिखे जिला प्रोबेशन अधिकारी के नंबर को लेकर उठ रहा है।
वह नंबर सेवा में ही नहीं है। ऐसे में अगर कोई बच्चा शिकायत करना चाहे तो कैसे करेगा। एक सवाल और भी है कि जब नंबर सही नहीं है तो क्या उसे सिर्फ दिखावे के लिए लिख रखा है। या फिर यह सब अधिकारियों को धोखा देने के लिए है।
सरकार का दावा है कि बाल गृह में बच्चों को अच्छा रहन-सहन दिया जाता है। उन्हें किसी चीज की कोई कमी नहीं है।
फिर भी सवाल वही रहता है कि अगर सब कुछ सही है तो बार-बार बच्चे भाग क्यों रहे हैं। इससे व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।