देवरिया। शहर के श्री मनोकामना पूर्ण हनुमान मंदिर के पास वाली विवादित जमीन पर बनी बाउंड्रीवॉल को तोड़ने के निर्णय के खिलाफ राज्य मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने नियंत्रक प्राधिकारी (जिलाधिकारी कोर्ट) में अपील दाखिल की है। राज्यमंत्री का दावा है कि जिस जमीन पर बाउंड्री है वह उनकी पुश्तैनी है।
करीब नौ माह पहले राज्यमंत्री की तरफ से बाउंड्री चलाकर मंदिर की तरफ गेट खोलने को लेकर विवाद हो गया था। विवाद बढ़ने पर प्रशासन के गेट को बंद करा दिया। इसके बाद मंदिर के उत्तराधिकारी महंथ ने नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र न्यायालय देवरिया में वाद दाखिल किया। इसकी सुनवाई के बाद न्यायालय ने बीते मार्च में राज्य मंत्री के कब्जा को अवैध बताते हुए ध्वस्त करने का आदेश दिया था।
इस पर विधिक राय लेने के बाद मंत्री की तरफ से बृहस्पतिवार को नियंत्रक प्राधिकारी कोर्ट में अपनी आपत्ति दाखिल की है।
लंबे समय से चला आ रहा है जमीन का विवाद : वर्ष 2024 में मंदिर के उत्तराधिकारी महंत राजेश नारायण दास और दूसरे पक्ष के बीच लंबे समय से भूमि पर कब्जे को लेकर विवाद चला आ रहा है। दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर जमीन हथियाने का आरोप लगाते रहे हैं।मंत्री के पक्ष ने चहारदीवारी का निर्माण कार्य शुरू कराया तो विवाद शुरू हो गया।
उस समय एडीएम प्रशासन, एएसडीएम, सीओ सिटी,कोतवाल सहित तहसील और राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। नायब तहसीलदार की देखरेख में राजस्व कर्मियों ने भूमि की पैमाइश की थी। पैमाइश से भी मामले का हल नहीं निकला था।
पिछले वर्ष मई में हुए विवाद के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मुकदमे दर्ज कराए थे। मंदिर भूमि पर कब्जे के आरोप में अधिवक्ता की तहरीर पर राज्यमंत्री के समर्थकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। वहीं बाद में मंत्री समर्थकों की शिकायत पर महंत पक्ष के लगभग 50 लोगों के विरुद्ध भी केस दर्ज हो गया था। 19 अगस्त 2025 को सुबह से लेकर शाम तक चले विवाद के बाद प्रशासन ने निर्माण कार्य रोकवा कर गेट को सील कर दिया है।
उधर मंदिर के उत्तराधिकारी महंत राजेश नारायण दास ने 18 अगस्त को न्यायालय नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र देवरिया में वाद दाखिल कर मामले में न्याय की गुहार लगाई थी।
जिसमें दोनों पक्ष की सुनवाई के बाद 25 मार्च को न्यायालय नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र देवरिया ने राज्य मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम द्वारा बिना किसी स्वीकृति के आरबीओ एक्ट की धारा 6 का उल्लंघन कर किए गए अनाधिकृति निर्माण को गिराने के लिए आरबीओ एक्ट की धारा 10 में प्रदत्त शक्तियों के अधीन ध्वस्तीकरण का आदेश दिया।