देवरिया। शहर के गोरखपुर रोड स्थित मजार की भूमि बंजर है। एएसडीएम कोर्ट ने फैसला सुनाया है। अपर उप जिलाधिकारी ने बंजर भूमि पर दर्ज फर्जी इन्द्राज को निरस्त कर दिया। साथ ही भूमि को दोबारा सरकारी अभिलेखों में बहाल करने का निर्देश दिया गया है।
एडीएम कोर्ट में सुनवाई के दौरान खुलासा हुआ कि खतौनी 1399 फसली के खाता संख्या 3 की आराजी संख्या 1647/2मि० (रकबा 0.124 हे०), जो राजस्व अभिलेखों में बंजर भूमि के रूप में दर्ज थी, उस पर फर्जी परवाने और कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर वक्फ/मजार के नाम दर्ज कराया गया था। एडीएम अवधेश कुमार निगम ने इस इन्द्राज को तत्काल निरस्त करने के साथ तहसीलदार देवरिया को आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
साथ ही राजस्व अभिलेख संशोधित करने का आदेश भी दिया गया है।
प्रशासनिक कार्रवाई सामने आने के बाद सदर विधायक डाॅ. शलभ मणि त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सच्चाई आखिरकार उजागर हो गई। उनके अनुसार, बंजर सरकारी जमीन पर फर्जीवाड़ा कर बनाई गई यह मजार पूर्ववर्ती सपा सरकार के षड्यंत्र का हिस्सा थी, जिसमें करोड़ों की भूमि पर कब्जा किया गया और विरोध करने पर समाजसेवी रामनगीना यादव की हत्या तक करा दी गई।