सलेमपुर। टीचर कॉलोनी में मंगलवार की शाम श्रीमद्भागवत कथा सुनाई गई। इसमें जरासंध वध प्रसंग का वर्णन किया गया। कथा में भगवत महिमा बाताते हुए कहा गया कि धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए भगवान समय-समय पर विभिन्न रूपों में अवतरित होते हैं।
कथा का रसपान कराते हुए आचार्य घनश्यामानंद ओझा ने बताया कि मगध नरेश जरासंध ने अनेक राजाओं को बंदी बनाकर रखा था। धर्म स्थापना के उद्देश्य से भगवान श्रीकृष्ण, भीम और अर्जुन ब्राह्मण वेश में उसके दरबार पहुंचे। जरासंध ने मल्लयुद्ध की चुनौती स्वीकार की और भीम के साथ कई दिनों तक भीषण युद्ध हुआ। अंत में भगवान श्रीकृष्ण के संकेत पर भीम ने जरासंध के शरीर को दो भागों में चीरकर विपरीत दिशा में फेंक दिया, जिससे उसका अंत हो गया और बंदी बनाए गए राजाओं को मुक्त कराया गया।
आचार्य ने कहा कि भगवान का संदेश है कि सत्य, धर्म और न्याय की विजय सदैव होती है, जबकि अहंकार और अन्याय का अंत निश्चित है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा श्रवण कर भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए। संवाद