फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दक्षिण अमेरिका में रामलीला का मंचन करेंगे देवरिया के कलाकार

Wed, 20 Jun 2018 11:01 PM IST
deoria
विज्ञापन
डायरेक्टर मानवेंद्र त्रिपाठी। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
देवरिया। दक्षिण अमेरिका के सूरीनाम, त्रिनिदाद और गुयाना जैसे देशों में उत्तर भारतीय रामलीला की धूम मचेगी। संस्कृति विभाग ने इसके लिए देवरिया के सांस्कृतिक संगम सलेमपुर की टीम को चुना है। टीम के 15 सदस्य 16 जुलाई से चार अगस्त तक दक्षिण अमेरिका के इन देशों में जाकर रियलिस्टिक शैली में न सिर्फ रामलीला का मंचन करेंगे, बल्कि भारतीय सभ्यता-संस्कृति के प्रेरणा पुरुष प्रभु श्रीराम के जीवन चरित्र से लोगों को रूबरू कराएंगे। 
विज्ञापन

गुयाना में भारतीयों के पदार्पण के 180 वर्ष पूरे होने पर भव्य समारोह का आयोजन हो रहा है। उत्तर भारतीय रामलीला का मंचन इस आयोजन का मुख्य हिस्सा होगा। वहां की सरकार के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग ने अयोध्या शोध संस्थान के माध्यम से सलेमपुर की सांस्कृतिक संगम की टीम को चुना है। यह टीम करीब 20 दिनों तक गुयाना के अलावा त्रिनिदाद एंड टोबैगो, सूरीनाम सहित अन्य देशों के अलग-अलग शहरों में अपना शो करेगी। पंद्रह सदस्यीय टीम में संस्था के अध्यक्ष समेत तीन सदस्य देवरिया, 11 गोरखपुर और एक इलाहाबाद के हैं। टीम में तीन महिला सदस्य भी हैं।  पंद्रह सदस्यीय टीम में संस्था के अध्यक्ष वाई. शंकर मूर्ति सलेमपुर, शिवकुमार मिश्र, पथरदेवा, मनोज त्रिपाठी, देवरिया और प्रभात मिश्र इलाहाबाद के हैं। इनके अलावा मानवेंद्र त्रिपाठी, पीयूष श्रीवास्तव, नवनीत जायसवाल, राधेश्याम गुप्ता, धानी गुप्ता, आकांक्षा, रीनी सिंह, राधेश्याम, मनीष श्रीवास्तव, परितोष श्रीवास्तव और रामदरश शर्मा गोरखपुर से हैं। खास बात यह कि टीम के अधिकांश सदस्यों का प्रोफेशन इससे इतर है। कोई सरकारी नौकरी में है तो कोई संगीत या कला सीख रहा है। 
पिछले 13 वर्षों से रामलीला का मंचन करते आ रहे सांस्कृतिक संगम सलेमपुर को पहली बार विदेश में मंचन का मौका मिला है। सामान्य रूप से इनकी टीम में कुल 70 सदस्य हैं, मगर दक्षिणी अमेरिका के टूर में सिर्फ 15 सदस्यों को ही चुना गया है। संस्था के निर्देशक मानवेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि सीमित संख्या के कारण उन्हीं कलाकारों को चुना गया है, जो कई भूमिकाएं निभाने में सक्षम हैं। मंच से इतर भी उनका योगदान लिया जाएगा।  
विज्ञापन


रियलिस्टिक शैली में होगी प्रस्तुति 
संस्था की खासियत रियलिस्टिक शैली में प्रस्तुति है। इसके जरिए दीर्घा में बैठे दर्शक न सिर्फ मंच से सीधे जुड़ते हैं, बल्कि यह आभास भी करते हैं कि रामलीला के सभी दृश्य वास्तव में हो रहे हैं।  

सलेमपुर से अमेरिका तक ऐसे पहुंची रामलीला 
मूल रूप से हैदराबाद के निवासी वाईएस शंकर मूर्ति करीब तीन दशक पहले व्यावसायिक कार्य के लिए सलेमपुर में बस गए थे। इसके बाद से यहीं के होकर रह गए। उनकी मुलाकात गोरखपुर के मानवेंद्र त्रिपाठी से हुई तो दोनों ने वर्ष 2004-05 में मिलकर सांस्कृतिक संगम की नींव रखी। अपने सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने के मकसद से मेघदूत की पूर्वांचल यात्रा से शुरुआत की और फिर रामलीला से जुड़े। वाईएस शंकर मूर्ति और मानवेंद्र ने बताया कि रामचरित मानस सिर्फ महाकाव्य ही नहीं, जीवन दर्शन भी है। राम के रूप में बेटे, सीता के रूप में पत्नी व बहू, भरत-लक्ष्मण जैसा भाई, कौशल्या जैसी माता सबकी इच्छा है। रामराज्य की स्वीकार्यता हर धर्म-मजहब में है। बस इसके सही ढंग से अमल की जरूरत है। रामलीला मंचन के जरिए राम के आदर्शों को सुव्यवस्थित ढंग से लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। यह यात्रा इस दिशा में बड़ी उपलब्धि होगी। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें