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Deoria News: कुत्तों का आतंक... कई रास्तों से गुजरना दुश्वार

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देवरिया। शहर से लेकर गांव तक कुत्तो का आतंक चिंता का सबब बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी इन पर लगाम नहीं लग सकी है। नगरपालिका परिषद ने इनके नियंत्रण का कोई प्रभावी इंतजाम नहीं किया है। इससे लोगों में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है।
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शहर में निराश्रित कुत्तों की अच्छी खासी संख्या है। शहर के कई मोहल्लों और रास्तों पर इनकी मजबूत निगरानी है। शहर में मेडिकल कालेज के गेट के पास लेकर सिंचाई विभाग तक कुत्तों के बड़े झुंड का पहरा रहता है।
यह कुत्ते शाम को सक्रिय होते हैं और पूरी रात सड़क पर घूमते रहते हैं। आते जाते वाहनों और लोगों को निशाना बना इनका रोज का काम है। इधर मछली बेचने वालों और चाय पानी दुकानों के चलते इनका आसानी से आहार भी मिल जाता है।
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इसलिए करीब दो दशक से यह क्षेत्र कुत्तों का पसंदीदा जगह बनी हुई है। इधर से रोज शाम को साकेत नगर में अपने घर जाने वाले अखिलेश्वर त्रिपाठी का कहना है कि सिंचाई विभाग के पास घूमने वाले कुत्ते काफी खतरनाक हैं। यह कई बार हमलावर हो जाते हैं। संयोग अच्छा है कि मैं अभी तक बचा हुआ हूं।
शहर के वार्ड नंबर 28 रामनाथ देवरिया दक्षिणी में छह से अधिक कुत्ताें का झुंड एक साथ घूमता रहता है। इनका इलाका सुदामा आटा चक्की से लेकर अंदर आधा किमी तक है। इनके इलाके से होकर रात में गुजरना आसान नहीं है।
राहगीरों को यह झट से दौड़ा लेते हैं। यह रहने वाले लोगों का कहना है कि यह कुत्ते निराश्रित हैं। रात में सावधानी से आना जाना पड़ता है। परशुराम चौक पर भी कुत्तों का आंतक है।
यहां झुंड में कुत्ते घूमते रहते हैं। सीसी रोड निवासी रविंद्रनाथ तिवारी ने बताया कि कुत्ते रात में आते जाते दौड़ा लेते हैं। शहर के पुरवां चौराहा, भटवलिया, नाथनगर, उमानगर में में सभी जगह कुत्तें अपना ठिकाना बनाए हुए हैं।
पर इन निराश्रित कुत्तों के लिए कोई शेल्टर होम अभी तक शहर में नहीं बना है। यही हाल नगर पंचायतों का है। जिले की किसी नगर पंचायत में अभी तक कुत्तों के लिए शेल्टर होम नहीं हैं।
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