सड़क हादसे में शिक्षक की मौत, मचा कोहराम
भटनी। खुखुंदू थाना क्षेत्र के डेहरी गांव के पास सड़क हादसे में भटनी निवासी शिक्षक की बृहस्पतिवार की रात मौत हो गई। जानकारी होने पर सकरापार गांव में शोक की लहर दौड़ गई। वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बंधुनाथ इंटर मीडिएट कॉलेज में सहायक अध्यापक थे। मौत की सूचना पर सहयोगी शिक्षक, ग्रामीण व रिश्तेदार पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। भटनी थाना क्षेत्र के सकरापार गांव निवासी प्रकाश चंद्र मिश्र (52) क्षेत्र के बंधुनाथ इंटरमीडिएट कॉलेज मायापुर इमिलिया में सहायक अध्यापक पद पर कार्यरत थे। वे कुछ सालों से अपने परिवार के साथ देवरिया के साकेतनगर में रहते थे। बृहस्पतिवार सुबह वह देवरिया से भटनी कॉलेज पढ़ाने आए थे। शाम को किसी कार्य वश गांव सकरापार में रुक गए। बाद में रात करीब साढ़े आठ बजे वे देवरिया के लिए घर से बाइक से निकले। अभी वे सलेमपुर-देवरिया मार्ग के खुखुंदू थाना क्षेत्र के डेहरी गांव के पहले ईंट भट्ठे तक पहुंचे थे कि तेज रफ्तार किसी वाहन की चपेट में आ गए। आसपास के लोगों ने इसकी जानकारी खुखुंदू पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कॉलेज के परिचय पत्र से पुलिस ने मृतक की पहचान की। शिक्षक की मौत की खबर जब साकेत नगर में पत्नी व बच्चों को हुई तो वे रोने लगे। मृतक शिक्षक की तीन संतानों में दो लड़कियां व लड़का है। वहीं घटना की जानकारी के बाद शुक्रवार को बंधुनाथ इंटर कॉलेज मायापुर में प्रधानाचार्य दिनेश कुमार मिश्र की अध्यक्षता में शोकसभा का आयोजन कर मृत शिक्षक की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। खुखुंदू के एसओ मुकेश कुमार मिश्र ने बताया कि पूछताछ में किसी ट्रेलर की चपेट में आने से शिक्षक की मौत होने की बात सामने आई है। वाहन व चालक की तलाश की जा रही है।
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इनसेट में
दोनों बेटियों को स्वावलंबी बनाने की चाह रह गई अधूरी
भटनी। मृतक शिक्षक प्रकाश चंद्र मिश्र अपनी दोनों बेटियों को पढा-लिखा कर स्वावलंबी बनाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने देवरिया साकेतनगर में किराए के मकान में रहकर बच्चों को पढ़ाते थे। लेकिन अपनी इच्छा को पूरी कर पाते, इसके पहले ही नियति ने उनको परिवार से छीन लिया। सकरापार गांव निवासी मृतक शिक्षक प्रकाश चंद्र मिश्र की दो बेटियां विद्या (18) व शैल (14) है, जबकि बेटा अभी छोटा है। शिक्षक दोनों बेटियों को हमेशा पढ़-लिख कर अपने पैरों पर खड़े होने की नसीहत देते थे। उनका मानना था कि लड़कियां जब स्वावलंबी होंगी तभी समाज का विकास होगा। बृहस्पतिवार को शिक्षक की मौत से उन पर मानो विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा। अब तो भाई के साथ -साथ मां की भी जिम्मेदारी उन पर आ गई है।