देवरिया/लार। जिले के करीब छह हजार से अधिक टीबी मरीजों को जुलाई 2025 से पोषण भत्ता नहीं मिल सका है। ऐसे में मरीजों को पोषण युक्त सामानों की खरीदारी करने में परेशानी हो रही है। जिससे उनका स्वास्थ्य रिकवरी जल्दी से नहीं हो पा रही है। भुगतान नहीं होने के पीछे स्वास्थ्य विभाग बजट का नहीं होना बता रहा है।
टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत शासन के तरफ से टीबी रोगियों को प्रत्येक माह इलाज के लिए एक हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। इस योजना का उद्देश्य मरीजों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना है। इसके लिए मरीज संबंधित विभाग में आवेदन करते हैं। जिसके बाद खाते में राशि भेजी जाती है। जिले में करीब छह हजार से अधिक मरीजों ने योजना का लाभ पाने के लिए आवेदन किया है। वर्तमान में सभी का उपचार भी चल रहा है। जुलाई 2025 से इन मरीजों को पोषण भत्ता नहीं मिल सका है। करीब नौ माह से पोषण भत्ता नहीं मिलने से रोगियों को परेशानी हो रही है।
निक्षय पोषण योजना के तहत सरकार ने नवंबर 2024 से सहायता राशि को 500 से बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया है। टीबी रोगियों का इलाज सामान्यतः छह से नौ माह तक चलता है। इस दौरान नियमित रूप से पौष्टिक आहार के साथ साथ दवाएं लेनी पड़ती है। वहीं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पोषण युक्त भोजन की अहम भूमिका होती है। कुछ रोगियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि सरकार के तरफ से मिलने वाली एक हजार रुपये पोषण भत्ता से हम महीने भर के लिए पौष्टिक आहार खरीद लेते थे। नौ महीने से भत्ता नहीं मिलने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक और मरीज ने कहा कि विभाग को जल्द बजट जारी कर देना चाहिए। जिससे कि हम मरीजों को रुक हुआ भत्ता मिल सके
पोर्टल में बदलाव के चलते दिक्कत आई है। जिले में आठ हजार मरीज हैं, जिनमें से दो हजार का एक्सटर्नल भुगतान किया जा चुका है। धन की कोई समस्या नहीं है। शेष छह हजार को भी भुगतान का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. राजेश कुमार, जिला क्षय रोग अधिकारी