संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में गंभीर मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। संसाधन न होने से रोजाना करीब बीस से पचीस मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ रहा है।
ऐसे में मरीजों को गोरखपुर, लखनऊ, वाराणसी सहित अन्य महानगरों की ओर रुख करना पड़ता है तो कुछ को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ पड़ता है।
यहां आईसीयू की सुविधा जरूरी है। इसके होने से मरीजों को काफी सहूलियत होगी।
मेडिकल कॉलेज को शुरू हुए चार साल हो गए। लोगों को लगा था कि इलाज के लिए महानगरों व निजी अस्पतालों में नहीं जाना पड़ेगा। यहीं पर सभी सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन अब तक आईसीयू सुविधा नहीं हो सकी है।
अस्पताल में शहर से लेकर ग्रामीणांचल के अलावा बिहार के सीमावर्ती क्षेत्र सहित करीब तीन हजार मरीज इलाज कराने आते हैं। इसमें पुरानी मरीज भी होते हैं।
डॉक्टर मरीजों को भर्ती कर इलाज करते हैं, मगर हालत गंभीर होने पर संसाधन न होने के कारण रेफर कर देते हैं। वार्ड में भर्ती औसतन करीब आठ से दस मरीजों को हायर सेंटर भेजा जाता है। आर्थिक रूप से सक्षम न होने पर कुछ लोग मरीज को समय से दूसरे अस्पताल में नहीं पहुंचा पाते हैं।
वहीं इमरजेंसी में आने वाले अधिकांश गंभीर मरीजों का सिर्फ प्राथमिक उपचार ही होता है। यहां से हर रोज करीब बीस से पचीस मरीजों को रेफर किया जाता है। मेडिकल कॉलेज में सांस, अस्थमा, सर्जरी, बर्न, दुर्घटना में घायल, न्यूरो, लकवा के अलावा जिन मरीजों की स्थिति गंभीर होती है उन्हें आईसीयू की जरूरत होती, लेकिन इन मरीजों का इलाज संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ रहा है।