किशोरियों को उठाने पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग सख्त, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी
देवरिया। कुशीनगर जनपद के खड्डा थाना क्षेत्र से नाबालिग लड़कियों को हिरासत में लेने का मामला पुलिस के गले की फांस बनता जा रहा है। दैनिक समाचार पत्र अमर उजाला में प्रमुखता से छपी खबर को संज्ञान में लेते हुए राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पुलिस अधीक्षक को पत्र भेज कार्रवाई करने को कहा है। इसके साथ ही दोषी पुलिस कर्मियों पर पांच दिन के भीतर कार्रवाई कर रिपोर्ट देने को कहा है।
कुशीनगर जनपद के खड्डा थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली दो बहनों को एक सप्ताह पहले रामपुर कारखाना के एक दरोगा और सिपाही ने जबरन अपनी प्राइवेट गाड़ी में बैठाकर लेकर चले गए थे। बिना वर्दी के पहुंचे पुलिसकर्मियों ने बिना खड्डा पुलिस को बताए इन लड़कियों को हिरासत में लिया था, जो नियम के विपरीत है। इस घटना के बाद लड़कियों का आरोप है कि उनके साथ पुलिस वालों ने उनके साथ खराब व्यवहार किया था। यहां तक की पुलिस पर आरोप है कि उन्होंने गाली दी, तमाचा मारा और बाल पकड़कर धक्का भी दिया। मानव सेवा संस्थान के निदेशक राजेश मणि ने उत्तर प्रदेश बाल आयोग के अध्यक्ष को इसकी जानकारी दी। इस पर मामले में पुलिस अधीक्षक डा.श्रीपति मिश्र ने दरोगा और सिपाही को तीन दिन पहले सस्पेंड कर दिया। अब इस प्रकरण में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। आयोग के अध्यक्ष डा. विशेष गुप्ता ने पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर कहा कि जांच में दोषी पाए गए पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पांच दिन के भीतर जवाब दें ताकि पीड़ित के साथ न्याय हो सकें। इस पत्र के बारे में आयोग ने जिलाधिकारी को भी जानकारी दी है।