रुद्रपुर के पूर्व एसडीएम सूर्यभान गिरि
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मंडलायुक्त की जांच में फंसे रिटायर्ड एसडीएम, सरकारी जमीन पर अवैध कब्जेदारों के हक में फैसला देने का आरोप
रुद्रपुर (देवरिया)। एसडीएम सूर्यभान गिरि को रुद्रपुर में अपना उत्थान और पतन दोनों देखना पड़ा। जिस तहसील में वह तहसीलदार से एसडीएम बन गए, उसी तहसील में उनके खिलाफ विरोध का स्वर मुखरित होने से उन्हें पेंशन से वंचित होकर अवकाश ग्रहण करना पड़ा। जांच में आरोप सिद्ध होने से सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें चैन नहीं मिल रहा है। पेंशन के लिए संघर्ष कर रहे पूर्व एसडीएम के खिलाफ सीएम ने लापरवाही और सरकारी जमीन पर अवैध कब्जेदारों के हक में फैसला देने के आरोप में केस दर्ज कर उनकी पेंशन से जमीन की धनराशि की रिकवरी का आदेश दिया है।
वर्ष 2018 में रुद्रपुर के एसडीएम रहे सूर्यभान गिरि पर 14 फाइलों में एकतरफा फैसला देने का आरोप है। इन मामले में केस की सुनवाई न्यायालय में नहीं हुई। फाइलों को फर्द काम में लिखी कार्यवाही को नजरअंदाज कर आवास पर बैठकर निपटा दिया गया। इनमें से एक फाइल में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले के हक में फैसला देने का आरोप है। एसडीएम की कारगुजारियों के खिलाफ किसान नेता और आरटीआई एक्टिविस्ट शब्बीर अहमद ने शासन में शिकायत की। एसडीएम ने उन्हें इसके लिए धमकी दी। इस बात को लेकर किसान नेता ने एसडीएम के खिलाफ थाने में धरना दिया तो उन्हें वहां से शांति भंग करने के आरोप में उठाकर जेल भेज दिया गया। मामला गर्माने पर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह भी एसडीएम के खिलाफ शासन में पैरवी में जुट गए। मामले में शासन ने जांच बैठा दी। मंडलायुक्त ने मामले की गहनता से जांच की। उन्होंने विवादित पत्रावलियों को जब्त कर लिया। आरोप लगाने वालों के बयान और पत्रावलियों के अवलोकन के बाद एसडीएम की भूमिका लापरवाह और संदिग्ध पाई गई। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने लापरवाही और भ्रष्टाचार में जीरो टालरेंस के फार्मूले पर आयुक्त को आरोपी एसडीएम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सरकारी जमीन की कीमत उनकी पेंशन से वसूलने का आदेश जारी किया है।