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शहीद विजय मौर्य को याद किया, शहादत पर गर्व जताया

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भटनी के छपिया जयदेव गांव में शहीद विजय को श्रद्धांजलि देतीं उनकी पत्नी। - फोटो : SALEMPUR
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शहीद विजय मौर्य को याद किया, शहादत पर गर्व जताया
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भटनी। पुलवामा हमले में शहीद हुए विजय कुमार मौर्य की तीसरी पुण्यतिथि पर सोमवार को उनके गांव छपिया जयदेव स्थित स्मारक पर पूरे दिन कार्यक्रम आयोजित होते रहे। बड़ी संख्या में जुटे लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनकी शहादत पर लोगों ने गर्व जताया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एडीएम वित्त व राजस्व नागेंद्र कुमार सिंह, सीआरओ अमृत लाल बिंद ने अन्य अधिकारियों के साथ कार्यक्रम में उपस्थित होकर शहीद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किया। मुख्य अतिथि ने कहा कि पुलवामा हमला, आतंकी संगठनों की कायराना हरकतों का परिणाम था। उसका जवाब देते हुए सरकार व देश की सेना ने अपने तरीके से बदला लेकर विश्व पटल पर देश का मान बढ़ाया। उन्होंने कहा कि इस देश के कण-कण में राष्ट्र के प्रति प्रेम बसता है।
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यहां के युवा हर सुबह सेना में भर्ती होने के सपने के साथ जागता है। देवरिया जनपद का नाम शहीद विजय मौर्य ने बलिदान देकर बढ़ाया। उन्होंने कहा कि शहीद विजय मौर्य के बलिदान से यहां के युवाओं को अपने जीवन को सफल बनाने के लिए प्रेरणा लेनी चाहिए। सीआरओ अमृत लाल बिंद ने कहा कि देशप्रेम पर यहां की महिलाएं, बच्चे, युवा, बुजुर्ग आजादी की लड़ाई से ही अपने प्राणों की आहुति देते रहे हैं। शहीद के पिता रमायन सिंह मौर्य की हर समस्याओं को लेकर जिला प्रशासन काफी गंभीर रहता है।
छपिया जयदेव को शहीद विजय कुमार मौर्य ने अपनी शहादत से अमर कर दिया है। श्रद्धांजलि सभा को सहायक कमांडेंट विक्रम सिंह पालीवाल, उपनिरीक्षक विनोद सिंह, द्वारिका सिंह आदि ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन राम औतार कुशवाहा तथा अध्यक्षता रमायन सिंह मौर्य ने किया। इस अवसर पर डॉ. संजीव शुक्ल, बीडीओ शकील अख्तर, गिरिजेश शाही, आशुतोष तिवारी, कैलाश यादव, विंदेश कुशवाहा, ओमप्रकाश मिश्र, अजय मिश्र, मिंटू मौर्य, अनिकेत, अमित तिवारी आदि उपस्थित रहे।
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बेटी आराध्या बोली, मैं भी पापा जैसे कपड़े पहनूंगी
भटनी। शहीद की पत्नी विजयलक्ष्मी का कहना है कि मुझे पति के न रहने का गम तो है, पर साथ ही उनकी शहादत पर गर्व भी है कि वह देश के लिए शहीद हुए। हमारी बेटी भी बड़ी होकर अपने पिता की तरह देश की सेवा करेगी। उन्होंने कहा कि बेटी आराध्या (6 वर्ष) भी हमेशा पापा जैसे बनने और वर्दी पहनने की जिद करती है। शहीद विजय के पिता रामायण सिंह मौर्य ने कहा कि आज भी छपिया गांव में शहीद बेटे की यादें लोगों की जेहन में जिंदा है। कोई ऐसा दिन नहीं, जब शहीद विजय की याद नहीं आती है।
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