पैकौली। बुढ़ापे में सहारे की आस लिए जिस बेटे को पिता ने लाड़-प्यार से पालकर बड़ा किया, उसी ने चंद रुपयों के लिए पिता की जान ले ली। जिन हाथों को थामकर पिता ने चलना और खाना सिखाया था, उन्हीं हाथाें ने पिता का सिर फोड़ दिया। गांव के लोग कह रहे हैं कि नशे ने इस परिवार को उजाड़ दिया। सुरौली थाना क्षेत्र के बहोरवा गांव में शुक्रवार की शाम हुई इस घटना ने पिता-पुत्र के रिश्ते की मिठास को भी झुलसा दिया। परिजनों के अनुसार, करीब एक साल पहले परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। घर बनवाने के लिए रामअवतार ने अपनी 14 कट्ठा जमीन बेच दी। इससे मिले रुपयों में से कुछ पैसे उनकी पत्नी के खाते में रखे थे। आरोपी शराब का आदी सुनील मां को डराकर-धमकाकर रुपये लेता था। रुपये की मांग पूरी नहीं होने पर वह घर में विवाद करता और पिता को भी धमकाता था। करीब छह महीने पहले भी सुनील ने पिता पर रॉड से हमला किया था। इस दौरान रामअवतार का कान कट गया था।
बेटे की इस हरकत के बावजूद पिता ने उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत नहीं की। उन्हें शायद उम्मीद थी कि बेटा एक दिन सुधर जाएगा, लेकिन पिता को मारने-पीटने और रुपये के लिए दबाव बनाने का सिलसिला नहीं थमा।
गांव वाले बताते हैं कि सुनील पहले टाइल्स लगाने का काम करता था। लेकिन, शराब की आदत ने उसे काम से दूर कर दिया। अब वह कभी कभार ही काम करता था। अधिकांश समय रुपयों के लिए मां-बाप से लड़ता रहता था।
घटना के बाद गांव में मातम छा गया। जिस उम्र में पिता को बेटे की देखभाल और सहारे की जरूरत थी, उसी उम्र में उन्हें अपने ही बेटे के हाथों जान गंवानी पड़ी। गांव में इस घटना को लेकर हर कोई स्तब्ध है।