जिले में कुल 200 निजी अस्पतालों का हो रहा संचालन, अग्शिमन विभाग की एनओसी मात्र 80 के पास
सीएमओ कार्यालय में महज 78 निजी अस्पतालों का है रजिस्ट्रेशन, कार्रवाई से परहेज कर रहे जिम्मेदार
शहर के भीड़भाड वाले इलाकों में हैं अस्पताल
देवरिया। शहर के ज्यादातर निजी अस्पताल आग के खतरे से बेपरवाह हैं। जिले में करीब 200 निजी अस्पताल संचालित होते हैं। लेकिन अग्शिमन विभाग की ओर से जारी की जाने वाली एनओसी सिर्फ 80 अस्पतालों के पास है। नियमों की अनदेखी कर संचालित होने वाले निजी अस्पतालों कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं
शहर से लेकर गांव तक निजी अस्पतालों की भरमार है। शहर का कोई ऐसा मोहल्ला नहीं है, जहां बड़े डॉक्टरों के नाम का बोर्ड लगाकर निजी अस्पताल न खोला गया हो। घनी आबादी में संचालित हो रहे कई अस्पतालों ने अग्शिमन विभाग की एनओसी नहीं ली है। उधर, जिनके पास एनओसी है उनमें कई ऐसे हैं जहां जहां आग लगने के बाद फायर विभाग की गाड़ियां ही नहीं पहुंच पाएंगी।
बीस से अधिक निजी अस्पतालों का नवीनीकरण अग्शिमन विभाग की एनओसी नहीं मिलने के कारण रोका गया है। 15 दिसंबर तक अस्पताल संचालक कागज नहीं देंगे तो रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया जाएगा - डॉ. आरपी यादव डिप्टी सीएमओ
-
80 निजी अस्पतालों को एनओसी दिया गया है। इससे ज्यादा तो शहर में ही अस्पताल चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग को जांच कर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी है। जो अस्पताल बिना एनओसी के संचालित होते है। उनके खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। बिना जांच किए किसी को एनओसी नहीं दिया जाता है। गलियों में खुले अस्पतालों को नियमानुसार ही एनओसी दिया गया होगा। -राजमंगल सिंह एफएसओ फायर ब्रिगेड देवरिया