बघौचघाट। पथरदेवा कस्बे के एक निजी अस्पताल में भर्ती गर्भवती की हालत बिगड़ने पर बुधवार की देर रात उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन से प्रसूता की जान तो बच गई, मगर नवजात की मौत हो गई।
इससे नाराज परिवार वालों और उनके शुभचिंतकों ने रात में ही निजी अस्पताल पहुंचकर हंगामा किया। इसके बाद संचालक ने इलाज के लिए लिए गए 50 हजार रुपये वापस कर दिए।
जानकारी के अनुसार, रीमा देवी (35) पत्नी रविंद्र चौहान, निवासी ग्राम श्यामपुर, थाना रामपुर कारखाना को प्रसव पीड़ा होने पर बुधवार की सुबह करीब सात बजे पथरदेवा कस्बे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
परिवार वालों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने ऑपरेशन की बात कहकर 50 हजार रुपये जमा करा लिए। पूरे दिन महिला का ऑपरेशन नहीं किया।
परिवार वालों का कहना है कि प्रसूता दिनभर दर्द से कराहती रही। उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। रात करीब 11 बजे रविंद्र चौहान की तरफ से अस्पताल पहुंचे पूर्व जिला पंचायत सदस्य राणा प्रताप सिंह ने इसकी सूचना सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी पथरदेवा डॉ. प्रभात रंजन और पुलिस चौकी पथरदेवा के प्रभारी को दी।
इसके बाद सीएचसी प्रभारी डॉ. प्रभात रंजन और पुलिस चौकी प्रभारी अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर ने मरीज की हालत गंभीर देखते हुए तत्काल मेडिकल कॉलेज देवरिया रेफर करा दिया।
इसकी जानकारी मिलते ही रविंद्र चौहान के समर्थन में रात में तमाम लोग निजी अस्पताल पहुंच गए और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे।
पुलिस चौकी प्रभारी ने समझाकर लोगों को शांत कराया। रात करीब 12 बजे तक चले विवाद के बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिवार वालों से लिए गए 50 हजार रुपये वापस कर दिए।
इसके बाद मामला शांत हुआ। देर रात मेडिकल कॉलेज में गर्भवती का ऑपरेशन किया गया। हालांकि, पेट में पल रहे शिशु की मौत हो चुकी थी। ऑपरेशन के बाद महिला की हालत में सुधार आया है। अभी वह मेडिकल कॉलेज में भर्ती है।
प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रभात रंजन ने बताया कि महिला की हालत गंभीर थी। प्राथमिक परीक्षण के बाद उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज देवरिया रेफर किया गया,जहां उसका उपचार कराया गया।