चैत्र नवरात्र : सज गए शक्तिपीठ, आज से होगी देवी आराधना
देवरिया। चैत्र नवरात्र के मद्देनजर तैयारियां शुरू हो गई हैं। जिले के शक्तिपीठों पर साफ-सफाई, रंगाई-पुताई के साथ ही प्रतिमाओं की साज सज्जा भी प्रारंभ हो गई है। शहर के देवरही मंदिर, राघवनगर, अहिल्यापुर स्थित देवी मंदिर लेकर ग्रामीण क्षेत्र के मंदिरों में नौ दिवसीय पूजन पाठ एवं श्रद्धालुओं को इसमें कोई दिक्कत न हो, इसके इंतजाम किए जा रहे हैं। बाजार में भी व्रत एवं पूजन को लेकर चहल-पहल रही। नौ दिन व्रत रहने वालों ने सामग्री की खरीदारी भी की।
दो अप्रैल दिन शनिवार से बासंतिक नवरात्र प्रारंभ हो रहा है। यह नए संवत्सर का प्रथम दिन भी है। शनिवार को नया वर्ष प्रारंभ होने के कारण वर्ष का अधिपति शनि ग्रह ही माना जाएगा। इस वर्ष नवरात्र पूरे नौ दिनों का है। कोई तिथि न खंडित, न क्षय और न ही वृद्धि को प्राप्त है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह नवरात्र संतुलन को बनाए रखने वाला और भारतीय समाज में सौम्यता और संतुलन की दृष्टि से उत्तम रहेगा। इस दिन सूर्योदय 5.51 बजे पर हो रहा है और प्रतिपदा तिथि का मान दिन में 11.29 बजे तक रहेगा। रेवती नक्षत्र दिन में 12.57 बजे तक है, पश्चात अश्विनी नक्षत्र है। बालाजी मंदिर के पीठाधीश्वर स्वामी राजनारायणाचार्य एवं ज्योतिषाचार्य पं.विवेक उपाध्याय एवं आचार्य विवेकानंद पांडेय ने बताया कि ऐंद्र योग प्रात: 8.22 बजे तक पश्चात वैधृति योग है। इस दिन धाता नामक औदायिक योग भी है। वासंतिक नवरात्र का समापन 10 अप्रैल दिन रविवार को हो रहा है। इस दिन दुर्गानवमी और रामनवमी का महापर्व आयोजित होगा। वसंत ऋतु में आयोजित होने वाले इस नवमी को रामनवमी के नाम से जाना जाता है। इसमें शक्ति और शक्तिधर दोनों की पूजा होती है जहां एक तरफ मां दुर्गा की आराधना की जाती है वहीं दूसरी तरफ भगवान विष्णु के अवतार श्री रामचंद्र जी की भी आराधना प्रतिदिन किया जाता है।
महाअष्टमी का व्रत नौ अप्रैल को
नौ अप्रैल दिन शनिवार को महाष्टमी का व्रत किया जाएगा। सूर्योदय की तिथि में अष्टमी होने से और अर्द्धरात्रि में नवमी का संयोग होने से महाष्टमी व्रत के लिए यह दिन पूर्ण प्रशस्त रहेगा। महानिशा पूजा बलिदान के लिए 8 अप्रैल शास्त्रोक्त मान्य रहेगा
कलश स्थापना के लिए यह होगा शुभ मुहूर्त
कलश की स्थापना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा में ही की जाती है, उस दिन प्रतिदिन तिथि में किसी कारण न हो सके तो उसी दिन द्वितीया तिथि में भी की जा सकती है। क्योंकि द्वितीया का निषेध नहीं मिलता है। वैसे प्रतिपदा तिथि को सर्वोत्तम माना गया है। धर्मशास्त्र के अनुसार कलश स्थापन के लिए द्विस्वभाव लग्न और अभिजित मुहूर्त अत्यंत प्रशस्त माना गया है। घट स्थापन का समय प्रात: काल उत्तम होता है। मध्याह्न के समय अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापन करना अत्यंत उत्तम माना जाता है। देवी का आवाहन, प्रवेशन, नित्यार्चन और विसर्जन यह सब प्रात: काल में शुभ होते हैं। दो अप्रैल को प्रात: काल, 5.51 बजे से 6.28 बजे तक, अभिजित मुहूर्त दिन में 11.36 से 12.36 बजे तक, पुन: दिन में 10.03 बजे से 12.17 बजे तक, पुन: अपराह्न 4.48 बजे के बाद 6.10 बजे तक द्विस्वभाव लग्न में कलश स्थापित किया जा सकता है।
देवी मंदिरों पर करें सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम : विधायक
देवरिया। विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने जिलाधिकारी से कहा है कि शनिवार से शुरू होने वाले नवरात्र को देखते हुए देवी मंदिरों पर स्वच्छता और सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया जाए। उन्होंने कहा है कि मंदिरों में भक्तों की काफी भीड़ होती है, जिसके चलते ध्यान दिया जाए कि किसी को दिक्कत का सामना न करना पड़े।