बनकटा। बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद से बॉर्डर पर शराब की तस्करी बढ़ती जा रही है। धंधेबाजों ने इस खेल में महिलाओं और नाबालिगों को उतार दिया है। पकड़े जाने पर पहले तो इन लोगों को छुड़ाने की कोशिश होती है और बाद में बात नहीं बनने पर इन्हें ही दोषी बनाकर अपराधी बच निकलते हैं। ऐसे कैरियरों पर धंधेबाजों को पैसा भी कम खर्च करना पड़ता है।
बनकटा और श्रीरामपुर थाना क्षेत्र बिहार के सिवान और गोपालगंज जिले की सीमा से सटा हुआ है। सीमावर्ती इलाके के कई गांवों से होकर गुजरने वाले कच्चे रास्ते, खेतों की पगडंडियां बिहार की सीमा को जोड़ती हैं। इन रास्तों का तस्कर सबसे अधिक उपयोग करते हैं। शराब के धंधेबाज बेरोजगार युवाओं के बाद अब गरीब परिवारों की महिलाओं और स्कूली बच्चों को रुपये का लालच देकर धंधे में शामिल कर रहे हैं। बताया जाता है कि कई महिलाएं रोजमर्रा के कामकाज की तरह रोजाना बिहार में शराब की सप्लाई के काम में जुड़ चुकी हैं। ये महिलाएं ट्रेन के माध्यम से छोटी-छोटी खेप बिहार में पहुंचाती हैं।
मुकदमे से तबाह हो रहा है भविष्य
शराब तस्करी में महिलाओं और किशोरों की बढ़ती सक्रियता काफी चिंताजनक है। पिछले साल नवंबर में बिहार की गुठनी पुलिस ने एक महिला समेत दो लोगों को अवैध शराब के साथ गिरफ्तार किया था। वह महिला बनकटा थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली है। अब वह मुकदमे में फंसकर परेशान है।
कब-कब पकड़ी गई शराब
- श्रीरामपुर पुलिस ने पांच जनवरी को 14 पेटी देसी शराब के साथ बाइक सवार को पकड़ा था।
- बनकटा थाना क्षेत्र के एकडंगा गांव के पास पांच फरवरी को एक किशोर 17 लीटर शराब के साथ पकड़ा गया था।
- पिछले साल दिसंबर में सिवान पुलिस ने एक किशोर को अंग्रेजी शराब की तस्करी के आरोप में पकड़ा था।
तस्कर शराब को बॉर्डर पार पहुंचाने के लिए हर हथकंडे अपना रहे हैं। वे कई बार महिलाओं और किशोराें का भी इस्तेमाल करते हैं। पुलिस लगातार इलाके में तस्करों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। लोगों को अपने घर के बच्चों को समझाना चाहिए कि ऐसी गतिविधियों में शामिल होने से उनका भविष्य बर्बाद हो रहा है।
अंशुमान श्रीवास्तव, सीओ भाटपार रानी