जम्मू-कश्मीर के शोपियां में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुआ रुद्रपुर का लाल
रुद्रपुर(देवरिया)। जम्मू कश्मीर के शोपिया में सेना और आंतकियों के बीच हुए मुठभेड़ में रुद्रपुर का लाल शहीद हो गया। शनिवार की सुबह सेना के सर्च ऑपरेशन के दौरान हुई घटना में सेना के हवलदार रुद्रपुर के टड़वा के बरईपार गांव निवासी संतोष यादव को गोली लग गई। कुछ देर बाद वह शहीद हो गए। उनकी शहादत की खबर आते ही रुद्रपुर में शोक की लहर दौड़ गई।
एकौना थाने के सचौली पटवनिया गांव के मूल निवासी शेषनाथ यादव अपनी ससुराल मदनपुर थाना के टड़वा के बरईपार में करीब बीस साल से मकान बनवा कर रहते हैं। उनका बड़ा बेटा संतोष यादव (28) साल बीएसएफ में हवलदार थे। वह सात साल पहले भर्ती हुए थे। वर्तमान में उनकी ड्यूटी जम्मू कश्मीर के शोपियां में थी। शनिवार की सुबह भारतीय सेना शोपियां के जैनापोरा इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रही थी। इस दौरान आतंकियों से उनकी मुठभेड़ हो गई। उसमें दो जवान शहीद हो गए। शहीदों में रुद्रपुर के संतोष यादव भी शामिल थे। सेना की जवाबी कार्रवाई में एक आतंकी मारा गया। घटना की खबर पहुंचते ही क्षेत्र के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। शहीद के दरवाजे पर लोगों की भीड़ जुट गई। शहीद के परिजन दहाड़े मार कर रोने लगे। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर लोगों की आंखें भर आईं। जम्मू में रुद्रपुर के लाल के शहीद होने पर लोगों की आंखें नम और दिल में गुस्सा है। मां मैना देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी धर्मशीला और दो मासूम बच्चियां पलक और जाह्नवी बेहाल थीं। शहीद का छोटा भाई मनोज यादव भी सेना का जवान है और वर्तमान में उनकी तैनाती ग्लेशियर में है।
फफक कर रो पड़े बुजुर्ग पिता
सेना के दो जवानों के पिता शेषनाथ बड़े बेटे संतोष के शहीद होने की खबर सुन कर फफक पड़े। बेटे के नहीं रहने की खबर पर उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था। पत्नी मैना देवी, बहू और शहीद की मासूम बेटियों को बेजार होकर रोता देख शेषनाथ अपने आंसू नहीं रोक पाए। बुढ़ापे में अपने जवान बेटे को खोकर वह बदहवास हो गए। अपने आंसुओं को संभालते हुए शहीद के पिता ने आतंकियों और उनको पनाह देने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। पत्नी मैना देवी की चीत्कार सुन लोग नियति को कोस रहे थे। संतोष यादव चार महीने पहले छुट्टी पूरी होने के बाद ड्यूटी पर गए थे।
बेटियों को अफसर बनाने का सपना रह गया अधूरा
जम्मू कश्मीर में शहीद हुए संतोष यादव की दो बेटियां पलक आठ वर्ष और जाह्नवी पांच साल की हैं। पत्नी धर्मशीला बेटियों की शिक्षा-दीक्षा के लिए देवरिया में किराए के मकान में रहती हैं। संतोष यादव बेटियों को पढ़ा-लिखा कर अफसर बनाना चाहते थे। इसके लिए वह पत्नी को बेटियों को लेकर शहर में रखे थे। संतोष यादव के शहीद होने की खबर सुनते ही पत्नी गांव पहुंच गईं। वह गोद में मासूम बेटियों को लेकर विलख कर रोने लगीं। वह बार-बार बेहोश हो जा रही थीं।
कैप्टन वरुण के बाद संतोष को खोने से गमगीन हुए लोग
कुन्नूर के हेलिकॉप्टर हादसे में रुद्रपुर के कन्हौली गांव के ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह के शहीद होने के बाद टड़वा के बरईपार निवासी संतोष यादव के शहीद होने की खबर से रुद्रपुर के लोग गमगीन हो गए। शहीद के दरवाजे पर लोग जुटने लगे। हर कोई शहीद के परिवार को ढांढस बंधाने में जुट गया।