गड़ेर। स्थानीय ग्राम सभा स्थित मां जलपा देवी मंदिर का इतिहास करीब 150 वर्ष पुराना है। यहां मत्था टेकने वालों की मुरादें पूरी होती हैं। मंदिर परिसर में देवी पर्वों पर पूजा-अर्चन के लिए भीड़ जुटती है। जबकि मेले का आयोजन किया जाता है।
चैत्र और शारदीय नवरात्र के अलावा अन्य देवी पर्वों पर गड़ेर स्थित सिद्ध पीठ मां जलपा देवी मंदिर परिसर में पूजा-अर्चन के लिए महिला-पुरुषों की भीड़ उमड़ती है। मन्नतें पूर्ण होने पर यहां दूर-दूर से लोग पूजा-अर्चन के लिए आते हैं। पुजारी युगल किशोर पाठक, राणा प्रताप कुशवाहा, विशाल गुप्त, सूर्यदेव सिंह, राजू बरनवाल आदि का कहना है कि अंग्रेजी हुकूमत में सिपाहियों ने एक दुल्हन की डोली को घेर लिया था। अंग्रेज सिपाहियों से दुल्हन भिड़ गई। जो वीरगति को प्राप्त हुई। वही महिला मां जलपा देवी के नाम से जानी जाती हैं। पुजारी ने बताया कि 27 मार्च दशमी के दिन भव्य भगवती जागरण और भंडारे का आयोजन किया गया है।