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जमीन के विवाद ने ले ली जान

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जमीन के विवाद ने ले ली जान
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देवरिया। तरकुलवा थाना क्षेत्र के शाहपुर पुरैनी में रविवार सुबह जमीनी विवाद ने एक युवती की जान ले ली। युवती की सहेली मुनीता गुप्ता को अभी भी विश्वास नहीं है कि उसकी बचपन की सहेली अब उसके साथ नहीं है।
खिड़की के रास्ते उसने पूरा विवाद देखा था और काजल जब चाकू से बुुरी तरह घायल हो गई थी, कोई बचाने नहीं आया तो वह खुद आगे आकर अपनी सहेली के शरीर पर लगे चोटों को कपड़े से बांधा। गांव के रंजीत यादव सहित अन्य लोगों को के सहयोग से अपनी सहेली को लेकर जिला अस्पताल पहुंच गई। वहां पर जब काजल ने दम तोड़ दिया तो उसके आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
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गांव के विक्रम गोंड व उनकी पत्नी मालती की चार संतानों में काजल सबसे छोटी थी। बड़ी बेटी अमृता की हो चुकी है और वह पति संग मुंबई में रहती है। इकलौता बेटा सतीश हिमाचल प्रदेश में अपने चाचा के साथ प्राइवेट नौकरी करता है। इसके बाद पिंकी एवं सबसे छोटी काजल है। विक्रम खेतीबाड़ी करके परिवार का पेट भरते हैं। उन्होंने ने भी सपने भी नहीं सोचा होगा कि जमीन के कुछ हिस्से के लिए उन्हें अपनी लाडली बेटी की जान से हाथ धोना पड़ेगा। घटना के समय ग्रामीणों ने आपसी विवाद को सुलझाने के लिए हो रही पंचायत को बहुत गंभीरता से नहीं लिया था। घायलावस्था में पड़ी काजल व उसके पिता को मुनीता, रंजीत सहित कुछ अन्य गांव के लोगों ने ही सहारा दिया। मोर्चरी में खड़ी मुनीता की डबडबाई आंखें ही सब कहानी बयां कर रही थी। उधर, घटना के बाद से गांव में पुलिस की तैनाती कर दी गई थी। काजल की मां मालती सहित अन्य परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है।
भाई के लिए आज दुल्हन देखने जाने वाली थी काजल
काजल की सबसे बड़ी बहन अमृता की शादी पांच साल पहले हो चुकी है। दूसरे नंबर पर भाई सतीश के लिए परिवारीजन सोमवार को दुल्हन देखने के लिए अहिल्यापुर मंदिर पर जाने वाले थे। तीसरे नंबर की बहन पिंकी जो काजल के साथ ही पढ़ती थी, उसका रो-रोकर बुरा हाल है।
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दोनों बहन एक साथ बिंदवलिया के एक प्राइवेट स्कूल में वर्ष 2018 में इंटर की परीक्षा दी थी। इसके बाद घर की माली हालत को देखते हुए दोनों बहनों ने पढ़ाई छोड़ दी और सिलाई ,बुनाई का कार्य सीखने लगी। पिता विक्रम दोनो बहनों की शादी एक साथ करना चाहते थे, हालांकि नियति को यह मंजूर नहीं था। दोनों बहनों को दुल्हन के रुप में घर से विदा करने का पिता का सपना भी अधूरा ही रहा गया।
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