देवरिया। पुलवामा में शहीद वीर जवानों के नाम देवरिया महोत्सव की शाम को कैलाश खेर ने यादगार बना दिया। गीतों के जरिए आतंकी हमले में शहीद जिले के लाल विजय कुमार मौर्य और उनके साथियों को श्रद्धांजलि दी तो पूरा पंडाल भावविभोर हो गया। फिल्म बाहुबली-टू के गीत क्या कभी अंबर से सूर्य बिछड़ता है, क्या कभी बिन बाती दीपक जलता है... कैसी है ये अनहोनी हर आंख हुई नम, छोड़ गया जो तू हमको कैसे जीएंगे हम... पर एकबारगी लोगों की आंखें नम हो गईं।
पिछले दो दिनों से कैलाश खेर को सुनने के लिए बेताब लोगों की भीड़ इस कदर उतावली थी कि शाम सात बजे से महोत्सव का विशाल पंडाल खचाखच भर गया था। उनके दीदार और गीतों को सुनने के लिए लोग बेकरार थे। इंतजार की घड़ियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही थीं। लग रहा था कि वक्त भी लंबा हो गया है। रात करीब पौने नौ बजे कौन है वो कौन है वो कहां से आया... को गुनगुनाते हुए खेर मंच पर हाजिर हुए तो लोगों ने कुर्सियों से खड़े होकर और दोनों हाथ उठाकर पूरे गर्मजोशी से उनका इस्तकबाल किया। अगले गीत मैं तो तेरे प्यार में दीवाना हो गया... से उन्होंने लोगों के प्यार के लिए आभार जताया। राह बुखारूं, पग पखारूं... आहो जी आहो जी आहो जी... पर उन्होंने मंच पर झूमना शुरू किया तो सामने बैठे लोग भी खुद को रोक नहीं सके। मोबाइल कैमरे की फ्लैश लाइट जलाकर लोगों ने अपने उत्साह का अहसास कराया। सामने लहराते तिरंगे के बीच देशभक्ति के उल्लास में गोते लगाते लोग कब कैलाश की दीवानगी में डूब गए पता ही नहीं चला। इसके बाद तो फिर एक से बढ़कर एक गीतों के साथ सुरीली शाम पर रात का पहरा बढ़ता गया और लोग मस्ती से सराबोर होकर उसमें खोते चले गए। युवाओं का शोर बता रहा था कि जब सुरों की सरगम जारी रहेगी, वह कहीं जाने वाले नहीं हैं। कैलाश खेर ने अपने सुप्रसिद्ध सूफी गीतों से महफिल लूटी तो देवरहा बाबा की भूमि से खुद को जोड़ते हुए हर किसी के दिलों में भी उतर गए। तौबा तौबा वे तेरी सूरत, माशा अल्लाह वे तेरी सूरत..., कैसे बताएं, क्यूं तुझको चाहें यारा बताना पाएं..., तेरे बिन नहीं लगदा दिल मेरा ढोलना... और गोरी सोई सेज पे, मुख पर डाले केश... जैसे गीतों पर भी लोगों को खूब झुमाया। राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम... से उन्होंने श्रोताओं में नई ऊर्जा भरी। देर रात तक लोग चले कार्यक्रम में डीएम अमित किशोर सहित अन्य प्रशासनिक, न्यायिक अधिकारी व जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
हाथ हिलाते रहे, मस्ती में झूमते रहे लोग
कैलाश खेर की दीवानगी लोगों के सिर चढ़कर बोली। उनकी एक-एक अदा पर लोग हाथ हिलाते मस्ती में झूमते रहे। खास बात यह थी कि कार्यक्रम को मनोरंजक बनाने के लिए वह खुद भी बार-बार लोगों से जुड़ने की कोशिश में रहे। अपने गीतों के साथ कभी लोगों से खुलकर नाचने की अपील करते रहे तो कभी गीत गुनगुनाने का आह्वान किया। लोगों ने भी उनका भरपूर साथ दिया।
कुंभ का न्योता ठुकरा कर, शहीद के लिए गाए कैलाश
देवरिया। भारत मां के वीर सपूतों को नमन करने के लिए कैलाश खेर ने कुंभ का न्योता ठुकरा दिया। देवरिया में शहीदों के नाम कार्यक्रम में शामिल होने के लिए वह प्रयागराज नहीं गए। उन्होंने मंच से जब इसे बयां किया तो तालियों की गर्मजोशी बता रही थी कि लोग उनके कितने आभारी हैं। कैलाश खेर ने मंच से शहीदों को म्यूजिकल श्रद्धांजलि देते हुए लोगों से अपील की कि वह खुलकर झूमें, नाचें और ईश्वर से प्रार्थना करें कि वह हमारे बेटे को, इस धरती के लाल की आत्मा को शांति दें।
नमस्कार देवरिया से लोगों का अभिवादन करते हुए कैलाश खेर ने कहा कि यह भूमि धन्य है। लोगों के उत्साह ने जाहिर कर दिया है कि यहां मौत के लिए मातम नहीं, प्रार्थनाएं होती हैं। जब भी विपदा की घड़ी आई है, हम एक होकर उससे लड़े हैं। शहीद की आत्मा हमें देख रही होगी और प्रार्थना कर रही होगी कि एक भारत-श्रेष्ठ भारत के लिए हमें ऊर्जा मिल सके। जिंदगी हमें जीना सिखाती है। इस वक्त भारत प्रतिशोध की ज्वाला में जल रहा है। शहीदों के नाम इस कार्यक्रम में हम नाच-नाच कर परमात्मा से प्रार्थना करेंगे कि हमें सही मार्गदर्शन करें, जिससे हम श्रेष्ठ भारत का निर्माण कर सकें।