शहीद विजय मौर्या के दरवाजे पर पार्थिव शरीर आने के पूर्व पाकिस्तान मुर्दाबाद का नारा लगाते लोग।
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देवरिया। हर तरफ शहीद विजय मौर्य अमर रहे के नारे थे और भारत माता के जयकारे गूंज रहे थे। कोई खून का बदला खून मांग रहा था तो कोई पीएम मोदी से खुली जंग का एलान करने की आवाज बुलंद कर रहा था। सबकी आंखें गुस्से से लाल थीं और चेहरे पर आक्रोश का भाव थे। अबकी हम न माफ करेंगे, पाकिस्तान को साफ करेंगे की हुंकार भरते युवा हाथों में तिरंगा और शहीद विजय की तस्वीर लेकर मार्च करते रहे। पुलवामा के आतंकी हमले में शहीद देवरिया के लाल विजय मौर्य के गांव छपिया जयदेव में शनिवार को ऐसा ही दृश्य था। सड़कों पर उमड़ा जन सैलाब मां भारती के वीर सपूत की एक झलक पाने को आतुर दिखा।
शहीद विजय की पार्थिव शरीर के पहुंचने की खबर के बाद सुबह से ही छपिया जयदेव को जाने वाली हर सड़क पर लोगों की भीड़ थी। भटनी-भाटपाररानी मार्ग से शहीद के घर तक जाने वाले संपर्क मार्ग को रातों-रात पिच कर दिया गया था। भटनी के 115 नंबर रेलवे क्रॉसिंग से नकहनी चौराहे की मुख्य सड़क के अलावा पगडंडियों से भी लोग छपिया जयदेव की राह पर थे। आलम यह था कि सुबह 10 बजे तक ही हजारों लोगों की भीड़ शहीद के दरवाजे पर पहुंच चुकी थी। दिन चढ़ने के साथ भीड़ बढ़ती गई। ज्यादातर लोग ऐसे थे, जिनकी विजय या उनके परिवार से न कोई जान-पहचान थी और न ही कोई रिश्तेदारी, मगर शहादत की खबर सुनकर वह खुद को रोक नहीं सके। कुशीनगर के कसया से संजय मिश्र, भारद्वाज पुरी, अशोक मिश्र, राजू जायसवाल, सत्यप्रकाश तिवारी, मंटू मिश्र, गौतम आदि का कहना था कि वह लोग देवरिया तक एक काम से आए थे। शहीद के बारे में जानकारी मिली तो दर्शन करने यहां चले आए। बलिया के नगरा से आए दिनेश, संदीप का कहना था कि हम उस माटी को नमन करने आए हैं, जिसने शहीद को जन्म दिया। उनके अंतिम दर्शन कर हम धन्य होंगे। गोरखपुर और सिवान से भी तमाम लोग गांव पहुंचे थे। आतंकी हमले ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया था। उनका कहना था कि अब जवानों की शहादत बहुत हो चुकी। सरकार को कड़ा फैसला करना ही होगा।