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Deoria News: हाथ छुड़ाकर भागा या खिड़की से कूदा, खुलेगा राज

Tue, 06 Oct 2026 12:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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मेडिकल कॉलेज के दवा काउंटर पर लगी भीड़।
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देवरिया। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज की दूसरी मंजिल से मरीज रामानुज चौहान आखिर कैसे नीचे गिरे, इसे लेकर दो अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। वार्ड में भर्ती मरीजों और तीमारदारों के बीच खिड़की से छलांग लगाने की चर्चा है, जबकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन के मुताबिक हादसे को किसी ने प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा। पत्नी और बहू के साथ जाते समय रामानुज के नीचे गिरने की जानकारी सामने आई है।
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डीएम मधुसूदन हुल्गी ने सदर तहसीलदार अलका सिंह के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए हैं। कमेटी की रिपोर्ट से ही साफ होगा कि रामानुज हाथ छुड़ाकर भागते समय दुर्घटनावश गिरे या खिड़की से छलांग लगाई।
बिहार के गोपालगंज जिले के भोरे थाना क्षेत्र के महदेवा बाजार निवासी 60 वर्षीय रामानुज लिवर की बीमारी से पीड़ित थे। सीएमएस डॉ. एचके मिश्रा के मुताबिक, हादसे से कुछ समय पहले पत्नी और बहू उन्हें कॉरिडोर में घुमाने अथवा वॉशरूम की ओर ले गई थीं। इसके बाद उनके शोर मचाने पर कर्मचारी पहुंचे तो रामानुज नीचे गिरे मिले।
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मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि हादसे के ठीक समय वहां कोई ऐसा प्रत्यक्षदर्शी सामने नहीं आया, जिसने मरीज को छलांग लगाते या गिरते देखा हो। यही वजह है कि हादसे की असली वजह जांच का अहम बिंदु होगी। हादसे के बाद कर्मचारी रामानुज को तत्काल इमरजेंसी ले गए। प्राचार्य डॉ. रजनी पटेल और सीएमएस डॉ. एसके मिश्रा भी पहुंचे और विशेषज्ञ डॉक्टरों को बुलाया गया। इलाज के बावजूद उनकी मौत हो गई।
परिवार वालों ने पोस्टमार्टम नहीं कराने की लिखित अर्जी दी और शव लेकर बिहार चले गए। इससे मौत से पहले लगी चोटों और गिरने की परिस्थितियों को लेकर पोस्टमार्टम से मिलने वाली चिकित्सकीय जानकारी भी नहीं मिल सकेगी। जांच कमेटी को वार्ड में उस समय तैनात कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और मरीज के साथ मौजूद परिजनों से घटना की परिस्थितियों की जानकारी जुटानी होगी। सीएमएस के मुताबिक, कॉलेज में करीब 250 सीसीटीवी कैमरे लगातार संचालित होते हैं और फुटेज का करीब 15 से 20 दिन का बैकअप रहता है। करीब 120 सुरक्षा गार्ड और 40 से 42 होमगार्ड भी तैनात हैं। बाउंड्री के चार गेटों में सुरक्षा के लिहाज से सामान्य तौर पर इमरजेंसी की ओर वाला गेट खुला रखा जाता है।
सीएमएस का कहना है कि जहां घटना हुई, वह फायर एग्जिट का हिस्सा है। अग्नि सुरक्षा मानकों के कारण हर खिड़की या रास्ते को लोहे की जाली लगाकर पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता। इससे पहले मेडिकल कॉलेज में महाराष्ट्र के सेवानिवृत्त इंजीनियर अशोक गवांडे का शव पानी की टंकी में मिलने की घटना भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर चुकी है।
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