संवाद न्यूज एजेंसी
तरकुलवा। कोन्हवलिया बाबूराय गांव की मुख्य इंटरलॉकिंग सड़क इन दिनों दलदल में तब्दील हो चुकी है। सड़क पर कचरे का अंबार लगा है। घर से बाहर निकलते ही लोग पैर कचरे में डालने को मजबूर हैं। दो हजार की आबादी संक्रमण के खतरे में जी रही है। लेकिन जिम्मेदार इससे बेखबर हैं। इसको लेकर ग्रामीणों में नाराजगी व्याप्त है।
सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी सुविधा देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बायां कर रही है। विकास खंड अंतर्गत स्थित कोन्हवलिया बाबूराय गांव के बीचोबीच में 200 मीटर लंबी इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण वर्ष 2010 में विधायक निधि से कराया गया था।
वर्तमान में मस्जिद से लेकर अतरी यादव की दुकान तक 100 मीटर इस सड़क की हालत नारकीय बनी हुई है। गांव की आबादी के बीच में स्थित इस सड़क की हालत ऐसी है, जिसे देखकर कोई भी चौक जाएगा। सड़क है या दलदल इसका अंतर कर पाना किसी के लिए भी मुश्किल हो जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि गांव की दो हजार की आबादी घर निकलते ही इसी सड़क पर पैर रखती है। इसी सड़क से होकर लोग गांव के बाहर निकलते हैं और अपने गंतव्य को जाते हैं। गांव में अंदर घुसते ही स्वागत कचरे के ढेर और कीचड़ से पटी सड़क से होता है। बरसात में कीचड़ और पानी के बीच राह गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है।
गांव के सामाजिक कार्यकर्ता नागेंद्र गुप्ता बताते हैं कि यह सड़क गांव की प्रमुख सड़क है, जिससे ग्रामीण गांव के बाहर निकालकर मुख्य सड़क तक पहुंचते हैं।
लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही से आज यह दलदल हो गई है। ग्रामीणों ने बीडीओ व ग्राम प्रधान से कई बार शिकायत कर सड़क के निर्माण की मांग की है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क निर्माण की मांग की है।