- चिह्नांकन के बाद नहीं हुआ ध्वस्तीकरण
- वर्ष 2023 में जर्जर मकान ढहने से दंपती व बच्ची की मौत के बाद भी गंभीर नहीं हुई नगर पालिका
- लापरवाही पड़ सकती है भारी, वर्ष 2021 से अब तक 125 के करीब जर्जर मकान हो चुके हैं चिह्नित
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शहर में सैकड़ों जर्जर भवन हादसे को दावत दे रहे हैं। दो वर्ष पूर्व 19 सितंबर को हुए हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मलबे में दबकर मौत हो गई थी। तत्कालीन जिलाधिकारी ने शहर के जर्जर भवनों का सर्वे कराकर उन्हें गिराने की बात कही थी। दो चार दिन की भागदौड़ के बाद प्रशासन बड़े हादसे के इंतजार में सुस्त हो गया। वर्ष 2021 से अब तक करीब 125 जर्जर मकान चिह्नित हो चुके हैं, लेकिन उसके ध्वस्तीकरण की कौन कहे अभी तक उसका पुरसाहाल लेने की जहमत नगर पालिका नहीं उठा सकी है।
शहरी क्षेत्र में ऐसे कई जर्जर सरकारी व निजी मकान हैं, जो बाहर से ही जीर्णशीर्ण नजर आ रहे हैं। ऐसे मकानों के ध्वस्त नहीं होने के कारण बड़ा हादसा हो सकता है, और ऐसे लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं, जिनका ये मकान नहीं है। नागरिकों की सुरक्षा का दायित्व प्रशासन और नगर पालिका परिषद का है, लेकिन जर्जर मकानों को तोड़ने की प्रक्रिया नहीं शुरू की जा रही है। संवाददाता ने रविवार को पड़ताल की तो मकानों के गिरने से हादसे के मामले में बड़ी लापरवाही नजर आई। ये तीन तस्वीरें नजीर हैं, जबकि शहर में और भी मामले में हैं, जहां हादसों का जोखिम है।
19 सितंबर 2023 में मां-बाप व बेटी की हुई थी मौत
शहर के मालवीय रोड स्थित गली में कुलदीप बरनवाल के जर्जर मकान में दिलीप गोंड का परिवार किराए पर रहता था। 19 सितंबर 2023 को तड़के 3:00 बजे जर्जर मकान भरभरा कर गिर गया। मलबे में दबकर दिलीप गोंड (35) उनकी पत्नी चांदनी (30) और दो वर्षीय बेटी पायल की मौत हो गई। वहीं दिलीप की मां घर से बाहर निकलकर रही थीं, उन्हें हल्की चोट आई। मौके पर पहुंचे तत्कालीन डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने मृतक परिवार में बची मां प्रभावती से मुलाकात कर संवेदना जताई और 12 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया।
जर्जर मकानों का हुआ था सर्वे
19 सितंबर 22 को जर्जर मकान के गिरने और दबकर तीन लोगों की मौत के बाद जिला प्रशासन समेत नगर पालिका प्रशासन गंभीर हुआ। शहर के जर्जर मकानों के सर्वे हुए। इसमें 95 मकान रहने के लिहाज से खतरनाक पाए गए। वर्ष 2023 में कुल 110 मकानों को खतरनाक चिह्नित किया गया। बता दें कि नगर पालिका वर्ष 2021 से ही ध्वस्तीकरण के लिए जर्जर मकान को चिह्नित कर रहा है, लेकिन अभी तक एक भी मकान का ध्वस्तीकरण नहीं हो सका है। अगर ध्वस्तीकरण हुआ होता तो 19 सितंबर को मां-बाप व बेटी की जान नहीं गई होती। आकड़ों पर गौर करें तो नगर पालिका ने वर्ष 2021 में करीब 65 जर्जर मकानों को चिह्नित किया। वर्ष 2022 में इनकी संख्या 95 पहुंच गई। 2023 में बढ़कर 110 हो गए। इसके बाद भी एक भी जर्जर मकान का ध्वस्तीकरण नहीं कराया गया। इस वर्ष जर्जर मकानों की संख्या 125 है। इधर नगर पालिका सुस्त है। उसे तनिक भी इन मकान में रहने वालों की चिंता नहीं है।
केस- एक
शहर के तहसील सदर चौक से रेलवे स्टेशन को जाने वाले मार्ग पर बाएं पटरी पर दो मकान एकदम से जर्जर हो चुके हैं। एक मकान में सब्जी की दुकान चलती है, तो दूसरे मकान में लोग रहते हैं। यहां हादसे की आशंका है।
केसदो
स्टेशन रोड स्थित जिला सहकारी बैंक संघ लिमिटेड का भवन एकदम जर्जर हो चुका है। यहां दर्जनों लोगों का रोजाना उठना-बैठना होता है। इस भवन को देखकर हर समय दुर्घटना का भय मन में बना रहता है।
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केस- तीन
रेलवे स्टेशन रोड स्थित भास्कर गली के पास एक व्यक्ति का निजी मकान है। इसमें ऊपरी मंजिल जर्जर हो चुकी है, और नीचे शराब की दुकान और गुटखा की गुमटी है। यह आवास रास्ते में भी गिर सकता है, लेकिन इसे गिराने की प्रक्रिया नहीं शुरू की जा रही है।
कोट
मकान ध्वस्तीकरण की जिम्मेदारी प्रशासन की है। अगर कोई अपना जर्जर मकान गिराना चाहता है तो वह नगर पालिका को लिखकर देगा, तब गिराया जाएगा। इस दौरान ध्वस्तीकरण का शुल्क उसे अदा करना होगा।
-संजय कुमार तिवारी, ईओ, नगर पालिका