विश्व में एक अरब से अधिक लोगों की भाषा बनी हिंदी’
देवरिया। आज से बारह सौ साल पूर्व अपनी यात्रा शुरू करने वाली हिंदी आज काफी प्रगति कर गई है। अपने प्रारंभिक दौर में जहां किसी प्रांत विशेष में बोली जाने वाली भाषा से यह काफी पीछे थी, आज उन सभी भाषाओं को पीछे छोड़कर कमोवेश पूरे भारत में फैल गई है। विश्व के छह अरब की आबादी में एक अरब से अधिक लोगों की यह भाषा बन गई है।
ये बातें रविवार को नागरी प्रचारिणी सभा के गांधी सभागार में विश्व हिंदी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में रामजी सहाय पीजी कॉलेज रुद्रपुर के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार यादव ने कहीं। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि अपने ही देश में हिंदी वैधानिक राष्ट्र भाषा नहीं है। जब तक हम हिंदी को यहां की वैधानिक राष्ट्र भाषा नहीं बनाते, तब तक संयुक्त राष्ट्र संघ में भी इसे भाषा का दर्जा दिलाना संभव नहीं है। हिंदी संगठनों को इसके लिए वृहद आंदोलन चलाने की जरूरत है। सभा के उपाध्यक्ष डॉ. दिवाकर प्रसाद तिवारी ने कहा कि विश्व के तमाम देशों में हिंदी में काम हो रहा है। लेकिन यह काम केवल भाषा के स्तर पर ही सीमित होकर रह गया है। मौके पर आयोजित कवि गोष्ठी में सच्चिदानंद पांडेय, धर्मदेव सिंह आतुर, शैलेष चंद्र तिवारी, उमेश पंकज, दयाशंकर कुशवाहा, सभा के मंत्री इंद्र कुमार दीक्षित, वरुण पांडेय, विनोद पांडेय, रविनंदन सैनी, छेदी प्रसाद गुप्ता विवश, सरोज कुमार पांडेय, शिव कुमार मिश्र ने भी अपनी रचनाएं पढ़ीं। इस दौरान अध्यक्ष परमेश्वर जोशी, बृजेश पांडेय, जितेंद्र प्रसाद तिवारी, डॉ. रमाकांत कुशवाहा, डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, उद्भव मिश्र, मनीष कुमार, उमाशंकर पाठक आदि मौजूद रहे।
देवरिया रत्न से सम्मानित हुए ध्रुवदेव मिश्र पाषाण
देवरिया। आचार्य व्यास मिश्र स्मृति देवरिया महोत्सव समिति की ओर से रविवार को विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर जिले के प्रख्यात कवि ध्रुवदेव मिश्र पाषाण को देवरिया रत्न से सम्मानित किया गया। संस्था की ओर से अध्यक्ष पवन कुमार मिश्र ने उन्हें अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न और सम्मान पत्र भेंट किया गया।