रुद्रपुर। गोर्रा नदी शुक्रवार को खतरे के निशान से 10 सेमी ऊपर 70.60 और राप्ती नदी खतरे के निशान से सिर्फ 10 सेमी नीचे 70.40 मीटर पर बह रही है। दोनों नदियों में उफान के चलते कछार और दोआबा के 116 गांवों के लोगों की मुसीबत बढ़ती जा रही हैं। बाढ़ के पानी से 20 गांवों के किसानों की करीब 1400 एकड़ फसल बर्बाद होने के कगार पर है। गोर्रा नदी स्थित पिंडरा पुल का एप्रोच फिर से दरकने लगा है।
पिछले सप्ताह हुई बारिश के बाद से गोर्रा और राप्ती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। गोर्रा नदी का पानी पिंडरा भुसवल बांध से निकले नाले से होकर श्रीनगर कोल्हुआ, मांगा कोडर, गौनरिया, काशीपुर, जोगिया, सिलहटा, गोनाह आदि गांवों में मक्के, अरहर, तिल और मूंगफली की फसल चौपट कर दी है। राप्ती नदी का पानी बथुआ नाले से होकर सोनबह, गायघाट, इस्लामाबाद के खेतों तक पहुंच गया है।
सबसे अधिक संकट पिंडरा पुल के एप्रोच पर है। जलस्तर बढ़ने की वजह से एप्रोच के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ गया है। वर्ष 2023 में पिंडरा पुल का एप्रोच धंस जाने से तीन माह तक आवागमन प्रभावित रहा। अब हर साल बरसात में नदी का जलस्तर गिरने पर यहां कटान शुरू हो जाता है।
एप्रोच पर कटान के कारण दोआबा के लोगों को एक बार फिर रास्ता बंद होने की चिंता सताने लगी है। वहीं राप्ती नदी के तटबंध तिघरा मराक्षी पर जगह-जगह रैटहोल के बीच कटान से मुसीबत बढ़ गई है। नदी तिघरा, हड़हा, भेड़ी, एकौना और मराक्षी के समीप निरोधात्मक कार्य पर कटान कर रही है।
इस संबंध में एसडीएम रुद्रपुर राजकुमार गुप्ता ने बताया कि जलस्तर भले ही खतरे के निशान को पार कर रहा गया है मगर अभी सबकुछ ठीक है। राजस्व कर्मियों की ड्यूटी लगाकर बांधों की निगरानी कराई जा रही है। सभी बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है।