- 116 गांवों में बाढ़ का खौफ, बांध पर बढ़ा नदियों का दबाव, किसानों ने मुआवजे की मांग की
रुद्रपुर। गोर्रा नदी के बढ़ते जलस्तर से कछार और दोआबा क्षेत्र के 116 गांवों में बाढ़ की आशंका गहरा गई है। मंगलवार को गोर्रा खतरे के निशान से महज 20 सेंटीमीटर नीचे बह रही थी जबकि नदी का पानी बांध और खेतों की ओर फैलने से करीब 300 एकड़ मक्के की फसल डूब गई। राप्ती भी लाल निशान की तरफ बढ़ रही है।
मंगलवार को गोर्रा नदी 70.30 मीटर पर बह रही थी, जबकि खतरे का निशान 70.50 मीटर है। राप्ती का जलस्तर 69.70 मीटर दर्ज की गई। खतरा बिंदु भी 70.50 मीटर है। गोर्रा का पानी नदी और बांध के बीच स्थित खेतों में भर गया है। पचलड़ी, ईश्वरपुरा, रतनपुर, बेलवा दुबौली, रमपुरवा और सुल्तानी समेत कई गांवों में मक्का और तिल की फसल डूब गई है। किसानों का कहना है कि नदी का पानी भरने से करीब 300 एकड़ में खड़ी मक्के की फसल बर्बाद हो गई है।
उधर, राप्ती नदी तिघरा मराछी बांध पर जगह-जगह दबाव बना रही है। हड़हा, तिघरा, भेड़ी और मराछी गांवों के पास कराए गए कटानरोधी कार्य के बोल्डर भी नदी के तेज बहाव में दरकने लगे हैं। करीब 14 किलोमीटर लंबे बांध पर बने रेनकट अब भी दुरुस्त नहीं किए गए हैं। इससे बांध से होकर आवागमन करने वाले लोगों को परेशानी हो रही है। नदी के तेवर और बांध की मौजूदा स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। दोआबा के रमेश पांडेय, रमाशंकर सिंह, नंदू यादव, बलवंत सिंह, रामपाल सिंह, मनोज सिंह, सुनील सिंह और आशुतोष शर्मा ने बताया कि नदी का पानी खेतों में पहुंचने से फसल नष्ट हो गई है। उन्होंने प्रशासन से क्षति का सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को जल्द मुआवजा देने की मांग की है।