अनुदानित स्कूलों में वर्ष 2000 के बाद हुई नियुक्तियों की होगी जांच
20 वर्ष के अंतराल में हुई शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन की तैयारी
बीएसए कार्यालय के अनुदानित पटल पर बढ़ गई चहल-पहल
फर्जी शिक्षक भर्ती मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिले के अनुदानित स्कूलों में हुए फर्जीवाड़े की जैसे-जैसे पोल खुल रही है। वैसे-वैसे संबंधित शिक्षकों एवं प्रबंधकों में हड़कंप मचा हुआ है। अब शासन भी इस पर गंभीर रुख अपनाए हुए है। इधर, सभी अनुदानित विद्यालयों में तैनात शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों की जांच का आदेश जारी कर दिया गया है। इसमें वर्ष 2000 के बाद हुई नियुक्तियों पर खास नजर रखी जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि सबसे ज्यादा फर्जी नियुक्तियां इन 20 वर्षों के दौरान ही प्रबंधकों ने बीएसए कार्यालय के तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से की है।
जिले में वर्तमान में 72 अनुदानित विद्यालयों का संचालन बीएसए कार्यालय स्तर से किया जा रहा है। इनमें 800 से अधिक शिक्षक काम कर रहे हैं। खास बात यह है कि इन अनुदानित विद्यालयों में सबसे अधिक सलेमपुर तहसील क्षेत्र में हैं और सबसे ज्यादा गड़बड़ी इन्हीं विद्यालयों में की गई है। कई जगहों पर तो दूसरे ब्लॉकों में तैनात रहे शिक्षकों ने कुछ वर्ष वहां रहने के बाद अधिकारियों व कर्मचारियों को चढ़ावा चढ़ाकर अपनी मनचाही जगह पर या घर से नजदीक वाले विद्यालयों में अपना स्थानांतरण भी करा लिया है। अब वह स्कूलों में कम और चौक-चौराहे पर सुबह व शाम को लगने वाले चाय पंचायत में प्रदेश व देश में सरकार व विपक्ष के कार्यों पर टीका-टिप्पणी कर राजनीतिक बहसबाजी में ज्यादा व्यस्त दिखाई देते हैं और अपनी-अपनी सरकार सरकार भी बनवाते-बिगाड़ते हैं। छात्रों की पढ़ाई-लिखाई से इनका कोई लेना-देना नहीं होता है। सब कुछ जानते हुए भी प्रबंध तंत्र के जिम्मेदार भी इन पर कोई कार्रवाई करने से बचते हैं। ऐसे शिक्षकों में तो कई सत्ताधारी दल से जुड़े लोग भी शामिल हैं। बीएसए प्रकाश नारायण श्रीवास्तव ने बताया कि एसटीएफ अपने स्तर से अनुदानित स्कूलों के शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन करा रही है।
शैक्षिक प्रमाण पत्रों सहित अन्य अभिलेखों को सहेजने में जुटे प्रबंधक
सही मायने में अब एडेड स्कूल के प्रबंधक जिन्होंने नियुक्तियों में जमकर धांधली की है, अब उनके माथे पर शिकन आई है। अपना गला फंसते देख अब यह अपने यहां तैनात शिक्षकों के रिकार्डों को सहेजने में लगे हैं। कई जगहों पर तो शिक्षकों से स्टांप पर लिखवाया भी जा रहा है कि प्रमाण पत्रों में गड़बड़ी के संबंध में प्रबंधक कही से जिम्मेदार नहीं है। फर्जी पाए गए तो उसके लिए सीधे वह शिक्षक ही जिम्मेदार होगा।
सतीश चंद मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद आई मामले में तेजी
17 फरवरी को एसटीएफ गोरखपुर ने पुरनाछापर निवासी एवं लघु माध्यमिक विद्यालय शाहपुर पुरैनी, पथरदेवा के शिक्षक सतीश चंद्र मिश्र उर्फ राजू को हिरासत में लिया था। उसने तीन विद्यालयों में फर्जी प्रमाण पत्रों पर 17 शिक्षकों की तैनाती कराने का राज भी उगला था। इसके बाद से ही अनुदानित स्कूलों में हुए फजीवाड़े की पोल खुलनी शुरू हो गई। कई स्कूलों में पूर्व में काम कर चुके शिक्षकों को हटाकर जब प्रबंधक तंत्र ने इनकी जगह अपने चहेतों को नौकरी दे दी तो इनकी भड़ास भी अब निकल रही है। वह अब शासन सहित एसटीएफ को पत्र लिख इसकी शिकायत भी कर रहे हैं। जांच एजेंसी को भी जिले अनुदानित स्कूलों में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ियों की शिकायतें अब तक मिल चुकी है।
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कोट:
अनुदानित स्कूलों में तैनात सभी शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन कराने का आदेश शासन की ओर से आ चुका है। बीएसए कार्यालय और जांच एजेंसी मिलकर अब इन सभी के प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराएगी। वर्ष 2000 के बाद हुईं नियुक्तियों में जमकर मनमानी की गई है। जिनके भी प्रमाण पत्र फर्जी मिलेंगे, उनकी बर्खास्तगी तय है।
-एसपी सिंह, इंस्पेक्टर एसटीएफ गोरखपुर।