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फोरलेन 22 माह की देरी, फिर भी काम अधूरे!

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फोरलेन में 22 माह की देरी, फिर भी काम अधूरा
300 करोड़ हो चुका है खर्च, एक रिवाइज एस्टीमेट पर मिला धन
विनोद कुमार तिवारी
देवरिया। लेटलतीफी के कारण सोनौली-नौतनवां, गोरखपुर, देवरिया-बलिया फोरलेन पर लोगों को राहत नहीं मिल सकी है। मई 2018 में निर्माण कार्य पूर्ण हो जाना चाहिए। लेकिन 22 माह की देरी के बाद भी प्रोजेक्ट अधूरा पड़ा है। अभी तक तकरीबन अस्सी फीसदी ही कार्य हो सका है। जबकि विभाग 90 प्रतिशत कार्य होने का दावा कर रहा है। शहर में अधूूरे कार्य हादसे के सबब बने हुए हैं। 22 माह में कई लोगों की मौत एवं 30 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। लोक निर्माण विभाग के अफसरों को फुर्सत ही नहीं कि वह अधूरे कार्य पूर्ण कराने के लिए निर्माण एजेंसी पर दबाव बनाएं।
सोनौली-गोरखपुर, देवरिया-बलिया फोरलेन निर्माण के लिए मार्च 2016 में स्वीकृति मिलने के बाद कार्य शुरू हुआ। इसके लिएए 336 करोड़ 16 लाख रुपये की स्वीकृति मिली। इसके तहत तकरीबन 48 किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य मई 2018 तक पूर्ण कराया जाना था। इसमें तकरीबन 35 किलोमीटर के निर्माण कार्य का जिम्मा दो पार्ट में लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड को मिला। पहले पार्ट में किलोमीटर 125 गोरखपुर सीमा से देवरिया शहर तक 128 करोड़ 26 लाख और देवरिया शहर से मुसैला चौराहा तक के लिए 109 करोड़ 34 लाख रुपये पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड को मुहैया कराए गए। इसके अलावा मुसैला चौराहे से सलेमपुर तक फोरलेन निर्माण के लिए तकरीबन 98 करोड़ रुपये 13 किलोमीटर निर्माण कार्य के लिए मुहैया कराए गए। बावजूद इसके निर्माण कार्य अस्सी फीसदी ही हो सका है। जबकि तकरीबन 300 करोड़ रुपये का भुगतान कार्यदायी एजेंसी को किया जा चुका है। 22 माह की लेटलतीफी के बावजूद भी कार्य अधूरा पड़ा है। वैसे लोक निर्माण विभाग के अधिकारी इसे रिवाइज एस्टीमेट की संस्तुति नहीं मिलना बता रहे हैं। जो भी हो अधूरे कार्यों की वजह से आएदिन सड़क पर कट पार करने के चक्कर में कोई न कोई घायल होता है। चौराहे पार करने में काफी दिक्कत होती है।
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रिवाइज हुआ एस्टीमेट, मिला 54 करोड़
देवरिया। सोनौली-गोरखपुर, देवरिया-बलिया फोरलेन राज्य मार्ग संख्या एक के लिए वैसे तो कई रिवाइज एस्टीमेट शासन को भेजे गए थे। इसमें देवरिया सीमा मझना नाला से देवरिया शहर तक 19 किलोमीटर दूरी तक चौड़ीकरण एवं सृदृढ़ीकरण कार्य के लिए 128 करोड़ 26 लाख की जगह एक अरब 82 लाख रुपये का बजट प्राप्त हो गया है। यानी तकरीबन 54 करोड़ 37 लाख रुपये अतिरिक्त लोक निर्माण विभाग को प्राप्त हो चुके हैं। बावजूद इसके कार्य में तेजी नहीं दिख रही है। अन्य रिवाइज एस्टीमेट की मंजूरी की हरी झंडी मिलने की उम्मीद है। गोरखपुर-देवरिया फोरलेन पर गोरखपुर जिले में चौरीचौरा तक के लिए रिवाइज एस्टीमेट पर शासन अपनी मुहर लगा चुका है।
यहां पड़ा है अधूरा कार्य
सोनौली-गोरखपुर, देवरिया-बलिया फोरलेन मार्ग निर्माण कार्य में बैतालपुर में डेढ़ किलोमीटर, देवरिया शहर में तीन किलोमीटर तक निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। पुरवा चौराहे से लेकर ओवरब्रिज होते एसएसबीएल तक यातायात का खासा दबाव है। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन तकरीबन 54 हजार वाहनों का आना-जाना होता है। कोऑपरेटिव चौराहा, मालवीय रोड, डीएम आवास से लेकर रुद्रपुर चौराहे तक लगता ही नहीं है कि फोरलेन है। चौड़ाई जहां 30 मीटर चौड़ा होनी चाहिए लेकिन मौके पर 20 से अधिक नहीं है। अतिक्रमण की वजह से सड़कें संकरी हो गई हैं। रिवाइज एस्टीमेट पर मुहर लगे तो फोरलेन के काम में तेजी आ सकती है। वैसे जिस रिवाइज एस्टीमेट की मंजूरी मिली है, उससे पटरी का चौड़ीकरण किया जाएगा। अधूरा पड़ा डिवाइडर बनाए जाने के कार्य में भी तेजी आएगी।
कोट:
शासन को रिवाइज एस्टीमेट पीडब्ल्यूडी ने भेजा है। इसमें चौराहों का चौड़ीकरण एवं नाली आदि का निर्माण कार्य है। रिवाइज एस्टीमेट पर शासन की मुहर लगने के बाद काम की रफ्तार तेज होगी। निर्माण कार्य में तेजी लाने एवं अधूरे कार्यों को पूर्ण कराए जाने के लिए लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
-डीएम, अमित किशोर।
नगरीय क्षेत्र में बनेंगे टेबल टॉप स्पीड ब्रेकर
शासन के निर्देश पर कार्ययोजना बनाने में जुटा पीडब्ल्यूडी
दुर्घटनाओं पर लगेगा अंकुश, तोड़े जाएंगे बेतरतीब ब्रेकर
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गाड़ी चलाते समय चकाचक सड़कों पर स्पीड ब्रेकर के हिचकोले नहीं खाने पड़ेंगे। शासन ने वाहनों की रफ्तार कम करने के लिए नगरीय क्षेत्र में टेबल टॉप स्पीड ब्रेकर बनाने के निर्देश दिए हैं। इससे वाहनों की गति धीमी होगी ही दुर्घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा। पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर नगर की सड़कों का सर्वे कर टेबल टॉप स्पीड ब्रेकर की कार्ययोजना तैयार करने में जुट गए हैं।
नगरीय क्षेत्र में तमाम ऐसी सड़के हैं, जहां आबादी वाले भाग में लोगों ने मनमाने तरीके से स्पीड ब्रेकर बनाया है। कहीं गिट्टी तारकोल से डेढ़ मीटर के बीच पांच से छह की संख्या में स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं तो कहीं सीमेंट पत्थर की मदद से छह इंच ऊंचा ब्रेकर बना दिया गया है। एक साथ बने कई स्पीड ब्रेकरों पर पहुंचते ही वाहन जंप करने लगते हैं। भीतर बैठे लोगों के सिर में चोट आती है। सबसे ज्यादा परेशानी टीलानुमा ब्रेकर पार करने में होती है। यहां अक्सर वाहन चालकों को इमरजेंसी ब्रेक लगाना पड़ता है। इसके चलते पीछे की ओर से आ रहे वाहनों से टक्कर हो जाती है। टेबल टॉप स्पीड ब्रेकर बनने से वाहन चालकों को सहूलियत मिलेगी। दुर्घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा।
इनसेट
मानकविहीन हैं प्लास्टिक के स्पीड ब्रेकर
स्थानीय लोगों की मांग पर पीडब्ल्यूडी की ओर से तमाम सड़कों पर प्लास्टिक के स्पीड ब्रेकर लगा दिए जाते हैं। कुछ दिनों बाद प्लास्टिक उखड़ जाता है। उसमें लगी कील रह जाने से वाहनों के टायर फटने लगते हैं।
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इनसेट
यह है आदर्श स्पीड ब्रेकर के मानक
आईआरसी के दिशा निर्देश के मुताबिक एक आदर्श स्पीड ब्रेकर की ऊंचाई दस सेंटीमीअर, लंबाई 2.5 मीटर और वृत्ताकार क्षेत्र यानी कर्वेचर रेडियस 17 मीटर होना चाहिए। साथ ही चालक को सचेत करने के लिए स्पीड ब्रेकर आने से 40 मीटर पहले चेतावनी बोर्ड लगा होना चाहिए। स्पीड ब्रेकर का मकसद वाहनों की रफ्तार 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा करना होता है। इस संबंध में एक्सईएन पीडब्लूडी निर्माण खंडकमल किशोर ने बताया कि शासन के निर्देश पर नगरीय क्षेत्र में टेबल टॉप स्पीड ब्रेकर निर्माण की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। धनावंटन होने पर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
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