देवरिया। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन के शिक्षक कृष्णमोहन सिंह के खुदकुशी के मामले में 196 दिन बाद आखिरकार देवरिया की पूर्व बीएसए शालिनी पुलिस के हत्थे चढ़ गई।
इस दौरान उसने पुलिस को खूब छकाया, मगर बच नहीं सकी। गिरफ्तारी से बचने के लिए पूर्व बीएसए ने इलाहाबाद हाईकोर्ट तक दौड़ लगाई, मगर वहां से भी उसे झटका लगा था।
शिक्षक कृष्णमोहन सिंह ने 20 फरवरी की रात गोरखपुर के गुलरिया थाना क्षेत्र में अपने भाई के घर पर खुदकुशी कर ली थी। शिक्षक ने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा था और वीडियो भी बनाया था। इसमें तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और उनके लिपिक संजीव सिंह पर 16 लाख रुपये लेने के बाद चार लाख रुपये और मांगने का आरोप लगाया था। कृष्णमोहन सिंह समेत दो अन्य शिक्षकों के मामले की हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में आदेश दे रखा था। आरोप है कि इस मामले में निर्णय नहीं लेकर एक साल तक मामले को बीएसए ने लटकाए रखा था।
शिक्षक की पत्नी गुड़िया देवी की शिकायत पर पुलिस ने गुलरिहा थाने में तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और एक अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद से दोनों फरार चल रहे थे। कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग निवासी कृष्ण मोहन सिंह (37) गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में परिवार के साथ रहते थे। वह देवरिया के गौरी बाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे।
सुसाइड नोट में यह भी लिखा था कि हाईकोर्ट के 13 फरवरी 2025 के आदेश के बावजूद उनकी वेतन बहाली नहीं की गई, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान थे। यह मामला काफी दिनों तक सुर्खियों में बना रहा।