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यूक्रेन से लौटे बेटे को परिवार के सदस्यों ने सीने से लगाया

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यूक्रेन से लौटे बेटे को परिवार के सदस्यों ने सीने से लगाया
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देसही देवरिया (देवरिया)। यूक्रेन में फंसे छात्र सुनील बृहस्पतिवार को अपने घर पहुंच पहुंचे। उन्हें देखते ही परिजन भावुक हो गए। परिवार के सदस्यों ने उन्हें सीने से लगा लिया।
सुनील ने बताया कि वह किसी तरह से 20 किलोमीटर पैदल चलकर रोमानिया सीमा पर पहुंचे। एंबेसी ने वहां पर बने कैंप में सारी सुविधाएं उपलब्ध कराईं। रात की फ्लाइट से एयर इंडिया स्टार एयरलाइन की ओर से सभी को फ्री सुविधा देकर स्वदेश लाया गया। महुआडीह थानाक्षेत्र के बेलवा बाजार गांव के मनोज मद्धेशिया प्रधान हैं। वह सात भाई हैं। मनोज सबसे बड़े हैं। उन्होंने अपने छठे नंबर के छोटे भाई सुनील मद्धेशिया को मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन भेजा था।
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वहां एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्र सुनील अगस्त में ही घर से गए थे। पड़ोसी देश में जाने के बाद वहां से बुधवार की दोपहर वह दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे। बृहस्पतिवार की दोपहर में प्रदेश सरकार की देखरेख में वह अपने गांव बेलवा बाजार पहुंचे। उन्होंने अपनी वृद्ध मां का पैर छुआ तो वह बेटे को सीने से लगाकर भावुक हो गईं। घर पहुंचे बेटे को निहारती रहीं। भाइयों ने भी गले लगाकर खुशी का इजहार किया। अपनों के बीच पहुंचे सुनील भी भावुक हो गए। कहा कि सरकार के प्रयास और लोगों के आशीर्वाद से वह घर पहुंचे हैं। कहा कि रूस के आक्रमण की चलते वहां भय और दहशत का माहौल है। सुनील के घर पहुंचने की जानकारी मिलते ही दरवाजे पर गांव के लोगों की भीड़ जुट गई। अपने होनहार को अपने बीच पाकर सबके चेहरों पर खुशी झलक रही थी।
बेटे से संपर्क नहीं होने से परिवार चिंतित
देवरिया। सदर कोतवाली के परसिया उर्फ खरजरवा निवासी नसीम अहमद ने एकलौते बेटे जफर नसीम अंसारी को एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए आठ दिसंबर को यूक्रेन की राजधानी कीव भेजा था। इस समय हालत यह है कि युद्ध से पूरा यूक्रेन अस्त-व्यस्त है। तबाही के मंजर की तस्वीरें विभिन्न माध्यमों से देखकर जफर के परिजन सहमे हैं। उनके पिता नसीम अहमद ने बताया कि बुधवार को बात हुई थी। उसने बताया था कि चालीस किमी पोलैंड की सीमा है। यहां तक हम सभी 60 छात्र पैदल चल पड़े हैं। पिता ने बताया कि शाम को मोबाइल फोन से मैसेज किया है, लेकिन बृहस्पतिवार की दोपहर तक उसका जवाब नहीं मिला है। इसके कारण पूरा परिवार सहमा हुआ है। मोबाइल फोन की घंटी बजने पर लगता है कि बेटे ने कॉल की होगी। रात में नींद नहीं आ रही है। बेटे के यूक्रेन में फंसे होने के कारण मां नजरूम निशा, बहन उजमा, रमीसा का हाल बेहाल है। वहां कि खौफनाक तस्वीर जेहन में कौंध रही हैं। संवाद
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यूक्रेन में फंसी बेटी के आने की राह देख रहे परिजन
देवरिया। यूक्रेन के खारकीव में फंसी उपासना के आने की राह परिजन देख रहे हैं। हर पल उनकी याद में परिवार के सदस्य डूबे हैं। बिना खाए-पीए करीब 20 किमी पैदल चलने के बाद भी बृहस्पतिवार को भी को बस, ट्रेन नहीं मिली है। इसकी जानकारी मिलने से परिजन सहमे हैं। दोपहर में वीडियो कालिंग के जरिए बात करते समय उपासना और परिजन काफी भावुक हो गए। शहर के बीआरडी इंटर कॉलेज की शिक्षक अन्नपूर्णा पांडेय की बेटी उपासना यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए गई हैं। बुधवार को उपासना को यूक्रेन में ट्रेन से धक्का देकर उतार दिया गया था। यह बात जब उन्होंने घर के लोगों को बताई तो परिजनों की चिंता और बढ़ गई। घर के लोग बेटी की सकुशल घर वापसी के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं। संवाद
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