पूर्व सांसद हरिवंश सहाय की शवयात्रा में टूटीं दलीय सीमाएं, पंचत्व में हुए विलीन
भाटपाररानी। पूर्व सांसद हरिवंश सहाय की शव यात्रा शुक्रवार को सुबह आठ बजे उनके नगर स्थित आवास से आरंभ हुई तो दलीय सीमाएं टूट गई। सभी दलों के नेता और कार्यकर्ता शव यात्रा में शामिल हुए। उनका अंतिम संस्कार खनुवा नदी घाट पर हुुआ। बड़े पुत्र अशोक कुशवाहा ने मुखाग्नि दी। नोएडा में उनका बृहस्पतिवार को निधन हो गया था।
उनके आवास पर सुबह से ही उनके अंतिम दर्शन के लिए नगर तथा क्षेत्र के लोगों की भीड़ जुटनी शुुरू हो गई थी। एसडीएम अरुण कुमार वर्मा, सीओ पंचम लाल ने जिला प्रशासन की ओर से उनके शव पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके पूर्व सभी दलों के नेताओं कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया। शव यात्रा भाटपाररानी स्थित उनके आवास से आरंभ होकर बेलपार चौराहा, जसुई, पकड़ी बाबू, खामपार, छपिया, भिंगारी होते हुए जब कुकुरघाटी चौराहे पर पहुंची तो क्षेत्र के लोग अपने नेता के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े थे। वहां से शवयात्रा उनके पैतृक गांव कुकुर घाटी के विशंभर टोला स्थित मकान पर पहुंची। वहां से खनुवा नदी घाट ले जाया गया। एसडीएम और सीओ की मौजूदगी में जिला पुलिस के जवान गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उनके बड़े पुत्र जिला जज अशोक कुशवाहा ने जब मुखाग्नि दी तो लोगों ने हरिवंश सहाय अमर रहे के नारे लगाने लगे। अश्रुपूर्ण आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान कई विधायक, पूर्व विधायक, जिला पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, पूर्व ग्राम प्रधान, शिक्षक, समाजसेवी, पत्रकार आदि मौजूद रहे।
ये प्रमुख लोग रहे उपस्थित
सांसद सलेमपुर रवींद्र कुशवाहा, पूर्व राज्य सभा सदस्य आस मुहम्मद, विधायक सभाकुंवर, बरहज विधायक दीपक मिश्र शाका, अजय दुबे, जयनाथ कुशवाहा, राजकुमार शाही, रवि प्रकाश एडवोकेट, राजेंद्र जायसवाल, पारसनाथ कुशवाहा, सुरेश तिवारी, संतोष पटेल, राजेश गुप्ता, चंदन मद्धेशिया, लाल बाबू यादव, सपा जिलाध्यक्ष डॉ. दिलीप यादव, पूर्व विधायक सुरेश यादव, स्वामीनाथ भाई, स्वामीनाथ यादव, बाबूलाल यादव, अशोक सिंह कुशवाहा, विनोद कुशवाहा, नगर पंचायत अध्यक्ष संजय गुप्ता, जिपंस विजय बहादुर चौरसिया, श्यामदेव यादव, गेना लाल यादव, आद्या प्रसाद यादव, सुधाकर गुप्ता, अभय यादव, सूरज यादव, सदानंद कुशवाहा, अशोक यादव, जेपी यादव, ब्लॉक प्रमुख लक्ष्मण खरवार, रमाशंकर यादव, जिला सचिव व्यास यादव, हृदय नारायण जायसवाल, ध्रुव गुप्ता, अशोक यादव, बसपा के जिलाध्यक्ष अजय कुमार, रुदल त्यागी, रमेश चंद, सुभाष प्रसाद, चंद्रप्रकाश, परमानंद भारती, माकपा के साधुशरण, जयप्रकाश यादव, जय प्रकाश कुशवाहा पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष सुधाकर गुप्ता, डॉ.सत्य नारायण शर्मा, रामजी यादव, भूलन, प्रधानाचार्य डॉ. विनय पांडेय, लालबाबू आदि शामिल रहे।
प्रेरणा स्रोत बने रहे रहेंगे हरिवंश सहाय
देवरिया। पूर्व सांसद हरिवंश सहाय के निधन पर जदयू विधानमंडल दल के पूर्व नेता सुभाष चंद्र श्रीवास्तव ने शोक जताया है। कहा कि उनके साथ सोशलिस्ट पार्टी से जनता पार्टी, लोकदल तथा जनता दल में काम करने का सौभाग्य मिला। आपातकाल में एक साथ जेल में बंद रहे। वह आजीवन सार्वजनिक जीवन में शुचिता व पवित्रता के प्रति संकल्पबद्ध रहे। वह जीवन भर सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहे। जनहित के सवालों पर उनके द्वारा किए गए संघर्षों ने उन्हें राजनीति में नई पहचान दी। उनके निधन से जो शून्यता उत्पन्न हुई है, उसे भरना कठिन है। सिद्धांत और मूल्यों से जुड़कर राजनीति में काम करने वाली वर्तमान युवा पीढ़ी के लिए वह बराबर प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।
पूर्व सांसद के निधन पर अधिवक्ताओं ने जताया शोक
सलेमपुर। तहसील में शुक्रवार को अधिवक्ताओं ने बैठक कर शुक्रवार को पूर्व सांसद हरिवंश सहाय के निधन पर शोक व्यक्त किया। अधिवक्ताओं ने कहा कि प्रखर समाजवादी नेता को हमने खो दिया। उनकी इमानदारी की चर्चा जनता में बराबर होती रहती है। शोक व्यक्त करने वालों में सुरेंद्र दुबे, परशुराम मिश्र, अशोक मिश्र, सुरेश सिंह, अर्जुन सिंह कुशवाहा, लालजी कुशवाहा, सदानंद कुशवाहा, अवधेश मौर्या, देवकृष्ण, दिलीप कुमार यादव, सत्येंद्र त्रिपाठी, विजय बहादुर सिंह, बृजनाथ यादव शामिल रहे।
पूर्व सांसद को लोगों ने दी श्रद्धांजलि
भाटपार रानी। पूर्व सांसद हरिवंश राय के आवास पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे सपा के पूर्व विधायक सुरेश यादव ने कहा कि वे अत्याचार और जुल्म के खिलाफ आवाज उठाते थे। विधायक सभाकुंवर ने कहा कि गरीबों-दलितों और पिछड़ों के लिए वे आजीवन सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ते रहे। पूर्व विधायक स्वामीनाथ बरहज एवं स्वामीनाथ यादव सलेमपुर ने कहा कि हमने पिछड़ों के एक मसीहा को खो दिया। सपा पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक सिंह कुशवाहा ने कहा कि वे पिछड़ों, दलितों और मजलूमों की आवाज थे। भाजपा के जिला उपाध्यक्ष अजय दुबे ने कहा कि उन्होंने आजीवन जुर्म और ज्यादती के विरुद्ध लड़ाई लड़ते रहे। कभी समझौता नहीं किया। इसके अलावा अनेक लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कहा कि हमने एक पूर्वांचल की मजबूत आवाज को सदा के लिए खो दिया। जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती।