बरहज। भलुअनी के मरहवां गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को कथावाचक पंडित पंचानन ने भक्तों को ध्रुव की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि बालक ध्रुव ने समाज के सामने दृढ़ संकल्प द्वारा कठिन से कठिन कार्य के सिद्ध होने का उदाहरण रखा था।
उन्होंने कहा कि बालक ध्रुव सूर्य वंश में राजा उत्तानपाद और सुनीति के पुत्र थे। एक दिन ध्रुव खेलते-खेलते पिता की गोद में बैठ गया। यह देखकर दूसरी रानी सुरुचि उनका बांह पकड़कर गोद से उतार दिया। रानी ने कहा कि यह स्थान तुम्हारा नहीं उनकेेपुत्र उत्तम का है। इस पर ध्रुव दुखी होे जाता है।
माता सुनीति के समझाने के बाद वह श्रीनारायण को पाने के लिए कठोर तपस्या के लिए निकल पड़े। इस मौके पर यजमान इंद्रकुमार दीक्षित, श्रवणकुमार, रविंद्र कुमार, वीरेंद्र कुमार, रेखा दीक्षित, बृजबिहारी, हरिश्चंद्र, कपिल देव शास्त्री, रामानंद, गोमती ओझा आदि मौजूद रहे। संवाद