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Deoria News: कागजों में शहर का मास्टर प्लान, सड़क कब्जाओ, मकान बनाओ की लगी होड़

Sun, 01 Sep 2024 11:33 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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देवरिया। महायोजना 2031 जल्द ही लागू होने वाली है। उम्मीद जताई जा रही है कि नए मास्टर प्लान से शहर की बसावट सुव्यवस्थित होगी। नए बाशिंदों को सड़क, नाली, बिजली, पानी जैसी सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी। लेकिन, पहले से हो रहे मास्टर प्लान के अमल की प्रक्रिया पर गौर करें तो यह उम्मीद बेमानी ही होगी।
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वर्तमान समय में विनियमित क्षेत्र देवरिया में महायोजना 2001 लागू है। इसमें नगर पालिका परिषद देवरिया समेत लगभग 80 गांव शामिल हैं। जहां किसी भी प्रकार के भवन निर्माण के लिए नियत प्राधिकारी कार्यालय से नक्शा पास कराना जरूरी है। शहर की सड़कों, गलियों पर नजर दौड़ाएं तो मास्टर प्लान की अनदेखी चहुंओर उजागर हो रही है। कहीं 30 फुट की सड़क 15 फुट बची है तो कहीं आधी से अधिक सड़क कब्जाकर लोगों ने इमारत खड़ी कर ली है। इसका खामियाजा हर एक शहरवासी को भुगतना पड़ रहा है। कई मोहल्ले ऐसे हैं जहां सड़क तो बन जा रही लेकिन, नाली निर्माण के लिए जगह नहीं मिल पा रही है। इसी प्रकार तमाम जगहों पर बिजली के पोल सड़क पर गाड़ने पड़े हैं। पेयजल पाइप के लिए सड़क की खुदाई करनी पड़ रही है।

शिकायत के बाद भी नहीं होती कार्रवाई
शहर के चकियवा वार्ड स्थित द्वारिकापुरी में जाने वाली सड़क नक्शे में 30 फुट है, लेकिन कुछ लोगों ने आधी सड़क कब्जाकर मकान बना लिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके लिए सुधा श्रीवास्तव समेत कई लोगों ने बार-बार नियत प्राधिकारी कार्यालय में शिकायत की। कार्रवाई न होने से सड़क पर अतिक्रमण हो गया।
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सड़क तक बन गए मकान, कहां बने नाली
रामगुलाम टोला में सेवा निवृत शिक्षक मनोज सिंह के सामने वाली सड़क के किनारे नाली का निर्माण करने के लिए जगह नहीं है। कारण कि कुछ लोगों ने सड़क पर मकान बना लिया है। इसके चलते लोगों के नाबदान का पानी सड़क पर बहता रहता है। इसी तरह शहर के बसियवां, गरूणपार, राघवनगर, रामनाथ देवरिया सहित कई मोहल्ले ऐसे है जहां महज सात से आठ में सड़क सिमट कर रह गई है।
नक्शे में 30 फीट, हकीकत उलट
कोऑपरेटिव चौराहे से हनुमान मंदिर जाने वाली सड़क नशे में 30 फीट है लेकिन मौके पर आधी हो गई है। सड़क पर एक साथ दो वाहन आने व जाने से जाम की स्थिति बन पड़ती है। कमोबेश शहर के अधिकांश मोहल्ले का यही हाल है। पहले तो सड़क के लिए पर्याप्त जमीन नहीं छोड़ी गई। इसके बाद नगर पालिका ने नाली का निर्माण करा दिया। इसके बाद विद्युत आपूर्ति के लिए विद्युत पोल लगा दिए गए। जिससे सड़कें संकरी होती गईं।
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मौके पर नहीं जाते अधिकारी
सड़क कब्जा होने के पीछे नियत प्राधिकारी कार्यालय के अधिकारी व कर्मचारियों की सुस्ती बड़ी वजह है। यह ज्यादातर समय आफिस के कागजी खानापूर्ति में ही लगे रहते हैं। क्षेत्र में किस भवन का निर्माण बिना नक्शा पास कराए हो रहा है, कौन से भवन का निर्माण नक्शा के विपरीत हो रहा है, यह देखने मौके पर नहीं जाते। यही कारण है कि ज्यादातर लोग मनमर्जी भवन बनाते जा रहे हैं।
कोट
पुराने मोहल्लों में ऐसी समस्या है। नए मोहल्लों में नक्शा के मुताबिक सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है। भवन निर्माण कराने वालों को हर हाल में नक्शा पास करना है। जहां तक रही सड़कों पर आवागमन में बाधक बन रहे विद्युत पोल की तो इसके लिए विभाग से बातचीत हुई है।
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-संजय कुमार तिवारी, ईओ, नगर पालिका
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