इंटर पास पूजा बनेगी देवरिया की आइकॉन
‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ के तहत पूजा के सजावटी सामानों की होगी ब्रॉडिंग और मार्केटिंग
धागे से बनी ज्वेलरी, ईयर रिंग, घरेलू सजावटी सामान से बटोर रही सराहना
फेब इंडिया के शोरूम और ऑनलाइन शॉप में धूम मचा रहे पूजा के प्रोडक्ट
मनीष जायसवाल
देवरिया। हाथों में हुनर और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो राहें खुद बन जाती हैं। फिर न संसाधनों की कमी आड़े आती है और न ही तकनीकी शिक्षा रोड़ा बनता है। इसकी मिसाल हैं सुरौली गांव की पूजा शाही। इंटर पास पूजा अपने हुनर और चुनौतियों से लड़ने के जुनून के चलते देवरिया की पहचान बन रही है। उसके हाथों से तैयार सजावटी सामान फेब इंडिया के शोरूम में धूम मचा रहे हैं तो विदेशों में भी खूब कद्र हो रही है। अब ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ से जुड़कर पूजा सजावटी सामानों के लिए देवरिया की आइकॉन बनेंगी। आईआईएम इंदौर ने भी पूजा के सामानों की ब्रॉड्रिंग और मार्केटिंग का भरोसा दिया है।
सुरौली गांव निवासी शिवरतन शाही की बेटी पूजा धागे के इस्तेमाल से ज्वेलरी और घरेलू सजावटी सामान बनाती हैं। जागृति मिशन की मदद से उसकी काबिलियत को पहचान मिलनी शुरू हुई है। फेब इंडिया की ऑनलाइन मार्केटिंग के साथ ही देशभर में उसके 50 से अधिक स्टोर पर भी पूजा के हाथों बने ईयर रिंग, नेकलेस, कंगन, गार्डन झूला सहित अन्य सामान बिक रहे हैं। वाराणसी में एक हॉस्टल की वार्डेन के तौर पर काम करने वाली यूएस की सासा हिल्स नामक महिला ने भी पूजा के सामानों को पसंद करते हुए ऑर्डर दिए हैं। हालांकि इन तमाम सफलताओं के बावजूद मलाल इस बात का है कि इसका श्रेय पूजा के खाते में न जाकर ब्रांडिंग और मार्केटिंग करने वाली कंपनियां ले रही हैं। हाल ही में अपने गांव देवरिया आए आईआईएम इंदौर के निदेशक डॉ. हिमांशु राय ने टाउनहाल सभागार के बाहर लगे पूजा के सामानों की प्रदर्शनी को सराहा है और इसकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग का भरोसा दिलाया। सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही धागों से बने पूजा के यह उत्पाद देश-दुनिया में देवरिया की पहचान बनेंगे।
50 महिलाएं भी हो रहीं आत्मनिर्भर
पूजा के साथ 50 महिलाओं की टीम भी काम कर रही है, जो पूजा के निर्देशन में ज्वेलरी व अन्य सजावटी सामान तैयार करती हैं। जिला प्रशासन ने हर ब्लॉक में महिलाओं का समूह गठित कर उन्हें इसके लिए प्रशिक्षण देने का जिम्मा भी पूजा को सौंपा है।
कुछ नया करने की थी जिद, चुनौतियों से लडने का जुनून
बचपन से पूजा में कुछ अलग करने की जिद थी। उनका मन सजावट वाले कामों में खूब लगता था। बताती हैं कि बचपन में गांव की अन्य महिलाओं को साड़ियों पर सितारा जड़ते देखतीं तो खुद भी करने को उत्सुक होती थीं। अपनी जिद को पूरी करने के लिए पूजा ने खेतों से गेहूं की बालियां इकट्ठा की। उसे बेचकर मां से नई साड़ी मंगवाई। जब उस पर सितारों की कलाकारी की तो हर कोई देखता रह गया। करीब सात वर्ष पहले जागृति मिशन के मुंबई के एक समारोह मेें देश-विदेश के तमाम लोग जुटे थे। उनके बीच जाने के लिए पूजा के पास ढंग के कपड़े थे न ही महंगी ज्वेलरी। तब मिशन की संरक्षक गौरी शर्मा त्रिपाठी के आग्रह पर वह अपनी धागे की ज्वेलरी पहनकर पहुंच गई, इसके बाद तो पूरे समारोह में वही आकर्षण का केंद्र रही। यहीं पर उन्होंने अपना पहला उत्पाद भी बेचा। उनके मुताबिक धागे से तैयार ऑउल की-चेन (उल्लू के आकार का चाभी रिंग) का उन्होंने 50-60 रुपये दाम की कल्पना की थी, लेकिन उसे 300 रुपये मिल गए। इसी तरह नेकलेस के बदले हजार रुपये मिले तो हौसला बढ़ा। वर्ष 2017 से वह फेब इंडिया में भी सामानों की आपूर्ति दे रही हैं।
ओडीओपी के तहत सजावटी सामान में पहले झूमर-झालर को ही शामिल किया गया था। पूजा के हुनर को देखने के बाद सजावट से जुड़ी उनकी कला को भी इसमें शामिल किया गया है। पिछले दिनों आईआईएम के निदेशक ने इसे प्रोत्साहन देने का भरोसा दिया है। 24-25 सितंबर को आयोजित उद्यम समागम में पूजा के सामानों का अलग स्टॉल लगेगा। उन्हेें आइकॉन के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि दूसरी महिलाएं भी प्रेरणा लें।
- कृष्ण कुमार अमर, उपायुक्त, जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र